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नागरिकता देने का अधिकार अब जिलाधिकारियों को

केंद्र ने जारी किए नए नियम नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 के तहत गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के निर्धारित क्षेत्रों तथा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जिलाधिकारियों को नागरिकता संबंधी […]

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Gauravshali Bharat News
  • August 21, 2026 9:44 am IST, Published 53 minutes ago

केंद्र ने जारी किए नए नियम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 के तहत गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के निर्धारित क्षेत्रों तथा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जिलाधिकारियों को नागरिकता संबंधी आवेदनों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

नए नियमों के तहत भारत के बाहर जन्मे ऐसे पात्र और उपयुक्त आवेदकों को पंजीकरण या प्राकृतिककरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया जिलाधिकारी स्तर पर पूरी की जा सकेगी, जो संबंधित क्षेत्रों में सामान्य रूप से निवास कर रहे हैं। त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।

जिलाधिकारी लेंगे नागरिकता आवेदनों पर फैसला

अधिसूचित नियमों के अनुसार, यदि जिलाधिकारी किसी आवेदक को पंजीकरण या प्राकृतिककरण के लिए पात्र और उपयुक्त पाते हैं, तो वे उसे भारतीय नागरिकता प्रदान कर सकेंगे। इसके लिए जिलाधिकारी को आवेदक की पात्रता और उपयुक्तता से संतुष्ट होना आवश्यक होगा।

इससे पहले इन मामलों में अधिकार प्राप्त समितियां और जिला स्तरीय समितियां प्रक्रिया को आगे बढ़ाती थीं। नए नियमों के बाद संबंधित क्षेत्रों में जिलाधिकारी इन समितियों की भूमिका निभाएंगे।

लंबित आवेदन भी जिलाधिकारियों को होंगे स्थानांतरित

केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि संबंधित क्षेत्रों में अधिकार प्राप्त समितियों और जिला स्तरीय समितियों के पास लंबित सभी नागरिकता आवेदनों को तत्काल संबंधित जिलाधिकारियों को स्थानांतरित किया जाए। इसके बाद इन आवेदनों पर नए नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आवेदक की व्यक्तिगत मौजूदगी अनिवार्य

नए नियमों में आवेदकों की व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर भी सख्त प्रावधान किया गया है। आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए आवेदक को स्वयं उपस्थित होना होगा।

नियमों के मुताबिक, यदि आवेदक को उचित अवसर दिए जाने के बावजूद वह आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होता है, तो जिलाधिकारी उसका आवेदन खारिज कर सकते हैं।

पुराने आदेशों को किया गया निरस्त

सरकार ने इस संबंध में जारी पिछले आदेशों को भी निरस्त कर दिया है। हालांकि, निरस्तीकरण से पहले किए जा चुके कार्यों या ऐसे कार्यों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिन्हें पहले ही पूरा किया जा चुका था।

केंद्र के इस बदलाव से नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले पात्र लोगों के मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को जिला स्तर पर अधिक सीधे और केंद्रीकृत तरीके से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

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