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ईडी जांच में टीएमसी के विमान सौदे पर उठे सवाल

कंपनी को 88.5 करोड़ रुपये के ब्याज-मुक्त जमा की जांच नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय की धनशोधन जांच में पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से जुड़े विमान किराये के एक सौदे को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, पार्टी के खजाने से करीब 160 करोड़ रुपये कोलकाता की कंपनी केयरवेल एविएशन […]

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  • August 17, 2026 9:33 am IST, Published 6 hours ago

कंपनी को 88.5 करोड़ रुपये के ब्याज-मुक्त जमा की जांच

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय की धनशोधन जांच में पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से जुड़े विमान किराये के एक सौदे को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, पार्टी के खजाने से करीब 160 करोड़ रुपये कोलकाता की कंपनी केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए। आरोप है कि इसी धनराशि से कंपनी ने एक निजी जेट और एक वीआईपी हेलीकॉप्टर खरीदा और बाद में दोनों को तृणमूल कांग्रेस को किराये पर दिया गया।

जांच का मुख्य केंद्र यह बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस ने कंपनी को करीब 88.5 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त सुरक्षा जमा दिया था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, कंपनी के पास विमान खरीदने के लिए पर्याप्त स्वयं की धनराशि नहीं थी।

जमा राशि के बाद विदेश से जुड़े लेन-देन की जांच

जांच के अनुसार, सुरक्षा जमा की राशि मिलने के बाद केयरवेल एविएशन ने इसे अपनी गुजरात के गिफ्ट सिटी में पंजीकृत इकाई केयरवेल फ्लाइजेट आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड को स्थानांतरित किया। इसके बाद विमान खरीद से जुड़े लेन-देन किए गए।

जांच में केमैन आइलैंड से जुड़े करीब 16 करोड़ रुपये के एक अन्य धन हस्तांतरण की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन लेन-देन का वास्तविक उद्देश्य क्या था और इनमें धन के स्रोत तथा इस्तेमाल की क्या भूमिका रही।

जेट और हेलीकॉप्टर के लिए करोड़ों का किराया

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस को जेट का 72 महीने और हेलीकॉप्टर का 56 महीने इस्तेमाल करने के लिए जीएसटी को छोड़कर करीब 186.9 करोड़ रुपये का भुगतान करना था।

जांचकर्ताओं का दावा है कि पार्टी ने न्यूनतम निर्धारित उड़ान घंटों का पूरा इस्तेमाल नहीं किया। इसके बावजूद वर्ष 2021 से 2026 के दौरान अन्य कंपनियों से विमान और हेलीकॉप्टर किराये पर लेने के लिए करीब 149 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

जांच एजेंसी को लेन-देन में दिखी कथित असामान्य व्यवस्था

जांचकर्ताओं के अनुसार, पूरे लेन-देन की संरचना एक ऐसी व्यावसायिक व्यवस्था जैसी दिखाई देती है, जिसमें पार्टी से प्राप्त धन का इस्तेमाल विमान खरीदने के लिए किया गया और बाद में वही विमान पार्टी को किराये पर दिए गए।

हालांकि, यह जांच एजेंसी का आरोप और जांच का हिस्सा है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी व्यक्ति या संस्था ने धनशोधन किया है, जब तक सक्षम प्राधिकारी या अदालत में आरोप सिद्ध न हो जाएं।

कब बनी कंपनी, कब खरीदा विमान?

केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का गठन 14 सितंबर 2021 को हुआ था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी के निदेशक पवन जाजू और रमेश जाजू हैं।

कंपनी ने 6 जून 2023 को एम्ब्राएर लिगेसी 600 जेट खरीदा। इसके बाद 17 अप्रैल 2025 को अगस्ता 109 ग्रैंड हेलीकॉप्टर खरीदा गया।

अब प्रवर्तन निदेशालय की जांच में इन खरीदों के लिए धन के स्रोत, सुरक्षा जमा, संबंधित कंपनियों के बीच हुए हस्तांतरण और तृणमूल कांग्रेस को विमान किराये पर दिए जाने की पूरी वित्तीय संरचना की पड़ताल की जा रही है।

महत्वपूर्ण: इस मामले में सामने आई बातें जांच एजेंसी के कथित निष्कर्षों और आरोपों पर आधारित हैं। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किसी कथित वित्तीय अनियमितता पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

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