नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने E20 ईंधन (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर फैल रही भ्रामक जानकारियों एवं अफवाहों पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों की एक संयुक्त त्वरित प्रतिक्रिया टीम गठित की है, जो फर्जी दावों और गलत सूचनाओं का तथ्यों और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर तुरंत जवाब देगी।
सरकार का कहना है कि E20 ईंधन को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारियां सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं। ऐसे में लोगों तक सही और प्रमाणिक जानकारी पहुंचाना आवश्यक है।
इस अभियान में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं। यह संयुक्त टीम वैज्ञानिक शोध, विशेषज्ञों की रिपोर्ट और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर जनता के सामने सही तथ्य रखेगी।
सरकार ने इस पहल में वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटो डीलरों, वाहन परीक्षण एजेंसियों, तेल विपणन कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को भी शामिल किया है। इन सभी के सहयोग से E20 ईंधन से जुड़ी सही जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जाएगी।
फर्जी पोस्ट और भ्रामक सामग्री की पहचान के लिए संबंधित मंत्रालयों में क्विक रिस्पॉन्स टीमें बनाई जा रही हैं। ये टीमें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही गलत जानकारियों की निगरानी करेंगी और समय रहते उनका तथ्यात्मक जवाब देंगी।
सरकार का विशेष ध्यान युवाओं और वाहन मालिकों पर है, क्योंकि यही वर्ग सोशल मीडिया पर सबसे अधिक सक्रिय रहता है। इसके अलावा वाहन चालकों के वास्तविक अनुभव, ऑटो कंपनियों की राय और तेल कंपनियों के आधिकारिक आंकड़े भी साझा किए जाएंगे, ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कुछ संगठन और राजनीतिक दल बिना एथनॉल वाले शुद्ध पेट्रोल की मांग को लेकर अभियान चला रहे हैं। ऐसे में सरकार वैज्ञानिक तथ्यों और शोध के आधार पर E20 ईंधन के लाभ और उपयोगिता को स्पष्ट करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चला रही है।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसी बहस को दबाना नहीं, बल्कि लोगों तक प्रमाणिक और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाकर भ्रम की स्थिति को समाप्त करना है।