FSSAI की बड़ी कार्रवाई

डाबर के ‘100% शुद्ध’ दावे वाले कई प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट नई दिल्ली: खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डाबर के कई खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी है। इनमें शहद, गाय का घी और अन्य ऐसे उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें कंपनी ‘100% शुद्ध’, ‘100% नेचुरल’, […]

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  • August 4, 2026 1:21 pm IST, Published 42 minutes ago

डाबर के ‘100% शुद्ध’ दावे वाले कई प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली: खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डाबर के कई खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी है। इनमें शहद, गाय का घी और अन्य ऐसे उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें कंपनी ‘100% शुद्ध’, ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योरिटी गारंटीड’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों के साथ बेच रही थी।

FSSAI ने इन दावों को भ्रामक और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला बताते हुए कंपनी को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

जांच में क्या मिला?

FSSAI के अनुसार, डाबर की वेबसाइट और उत्पादों की जांच के दौरान कई ऐसे दावे पाए गए जो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 का उल्लंघन करते हैं।

जांच में निम्न दावे पाए गए:

  • 100% Natural
  • 100% Pure
  • 100% Purity Guaranteed
  • 100% Organic
  • 100% Tender Coconut Water

प्राधिकरण का कहना है कि ऐसे ‘100%’ दावों के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं दिए गए, जिससे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की संभावना है।

अन्य उल्लंघन भी सामने आए

FSSAI ने बताया कि कुछ उत्पादों पर बिना वैध प्रमाणन के ‘जैविक भारत’ (Jaivik Bharat) लोगो का उपयोग किया गया।

इसके अलावा डाबर होममेड कोकोनट मिल्क को “100% Purity” के दावे के साथ बेचा जा रहा था, जबकि नियमों के अनुसार मिश्रित (Compound) खाद्य उत्पादों पर ऐसा दावा करना अनुमत नहीं है।

पहले भी जारी किया गया था नोटिस

FSSAI ने बताया कि इससे पहले भी कंपनी को ऐसे भ्रामक दावों को तत्काल हटाने का नोटिस दिया गया था, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद प्राधिकरण ने संबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया।

अब डाबर को 15 दिनों के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि उसने आदेश के पालन में क्या कार्रवाई की है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने हैं?

FSSAI का कहना है कि खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले दावे सत्य, प्रमाणित और नियमों के अनुरूप होने चाहिए। किसी भी कंपनी को ऐसे दावे करने की अनुमति नहीं है जो उपभोक्ताओं को भ्रमित करें या उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर गलत धारणा पैदा करें।

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