मोहाली: केंद्रीय रसायन और उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर), मोहाली का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान के औषधीय पौधों के उद्यान का उद्घाटन किया और अनुसंधान, नवाचार तथा उद्योग सहयोग से जुड़े विभिन्न कार्यों की समीक्षा की।केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को बायोफार्मास्यूटिकल क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में पहुंचाना है। उन्होंने विशेष रूप से एपीआई, प्रमुख शुरुआती सामग्री, सिंथेसिस इंटरमीडिएट्स और बायोलॉजिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया और अनुसंधान ढांचे को मजबूत करना और नवाचार को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए निरंतर नीतिगत समर्थन और वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एनआईपीईआर जैसे संस्थान देश के लिए उद्योग-उपयुक्त कुशल मानव संसाधन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
फार्मास्युटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी ने संकाय और छात्रों के साथ संवाद किया और अनुसंधान को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल पेटेंट तक सीमित रहने के बजाय ऐसे शोध परिणाम तैयार होने चाहिए जिनका वास्तविक उपयोग और व्यावसायिक महत्व हो। उन्होंने उद्योग सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बाहरी शोध अनुदानों को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा प्रदर्शन सुधार के लिए प्रोत्साहन व्यवस्था को मजबूत करने का सुझाव दिया। संस्थान ने इस अवसर पर अपने उत्कृष्टता केंद्रों का प्रदर्शन किया, जिनमें जैव-औषधीय पदार्थों पर उन्नत शोध, सेल और जीन थेरेपी, बायोसिमिलर, चिकित्सा उपकरण, एआई आधारित फार्माकोइन्फॉर्मेटिक्स और उन्नत दवा वितरण प्रणालियां शामिल थीं। केंद्रीय मंत्री ने छात्रों और शोधकर्ताओं द्वारा विकसित प्रोटोटाइप, पोस्टर और नवाचार परियोजनाओं का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में उद्योग सहयोग, पेटेंट और क्लिनिकल ट्रायल से जुड़े कार्यों को भी प्रस्तुत किया गया। भारत सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत फार्मास्युटिकल शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को मजबूत कर एक आत्मनिर्भर बायोफार्मास्यूटिकल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।