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परीक्षा व्यवस्था को लेकर नंदन नीलेकणि 13 सितंबर तक सुझाव मांगे

नयी दिल्ली:  देश में सार्वजनिक परीक्षाओं की व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA समेत विभिन्न सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन की समीक्षा और उनमें सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्य […]

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  • August 29, 2026 1:10 pm IST, Published 50 minutes ago

नयी दिल्ली:  देश में सार्वजनिक परीक्षाओं की व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA समेत विभिन्न सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन की समीक्षा और उनमें सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्य बल का गठन किया है। इस कार्य बल का उद्देश्य मौजूदा परीक्षा व्यवस्था की कमियों को समझना और भविष्य के लिए ऐसी प्रणाली तैयार करना है, जिसमें सुरक्षा, निष्पक्षता और तकनीक का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके।

उच्चस्तरीय कार्य बल सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़ी संस्थागत व्यवस्थाओं, प्रक्रियाओं और प्रशासनिक उपायों का व्यापक अध्ययन कर रहा है। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल, परीक्षा केंद्रों की क्षमता, अभ्यर्थियों की सुविधा और परीक्षा की विश्वसनीयता जैसे विषयों पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि सार्वजनिक परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया ऐसी हो, जिस पर विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा मजबूत हो और किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश कम से कम रहे।

इस सुधार प्रक्रिया में सरकार ने विद्यार्थियों और उम्मीदवारों से सीधे सुझाव मांगे हैं। इसके अलावा अभिभावक, शिक्षक, शैक्षणिक संस्थान, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं, परीक्षा सामग्री तैयार करने वाले संगठन, विषय विशेषज्ञ, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग संगठन और नागरिक समाज संस्थाएं भी अपने सुझाव दे सकती हैं। सरकार का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग वर्गों के अनुभव और व्यावहारिक सुझाव महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

हितधारकों से सार्वजनिक परीक्षाओं को सुरक्षित तरीके से आयोजित करने को लेकर सुझाव मांगे गए हैं। परीक्षा की संरचना, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया और मूल्यांकन पद्धति में सुधार भी चर्चा का हिस्सा है। इसके साथ परीक्षा संस्थाओं की जवाबदेही, प्रशासनिक व्यवस्था और शासन प्रणाली को मजबूत करने पर भी सुझाव लिए जा रहे हैं।

परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य प्रकार के कदाचार को रोकना भी कार्य बल के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। कदाचार की पहचान, उसकी जांच और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा। इसके लिए तकनीक की मदद लेने और ऐसी प्रणालियां विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुरक्षित बनाई जा सके।

सुरक्षित कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं को लेकर भी सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच परीक्षा प्रणाली को साइबर सुरक्षा के लिहाज से मजबूत बनाना जरूरी माना जा रहा है। परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता, तकनीकी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर भी कार्य बल विचार कर रहा है, ताकि बड़े स्तर पर परीक्षाओं का संचालन बिना व्यवधान के किया जा सके।

समावेशिता भी परीक्षा सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार ऐसे परीक्षा ढांचे की दिशा में काम करना चाहती है, जिससे सामाजिक, आर्थिक, क्षेत्रीय और भाषाई आधार पर अलग-अलग समूहों के उम्मीदवारों को बेहतर अवसर मिल सकें। परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने और विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखने पर भी सुझाव मांगे गए हैं।

पारदर्शिता और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। परीक्षा से संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध कराने, अभ्यर्थियों की शिकायतों का उचित समाधान करने और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं तथा उम्मीदवारों के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण में विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देने के लिए भी सुझाव लिए जा रहे हैं।

सभी हितधारक अपने सुझाव 13 सितंबर 2026 तक भेज सकते हैं। सुझाव अंग्रेजी, हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। इसके लिए निर्धारित वेबसाइट, फोन, WhatsApp और ईमेल माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर उच्चस्तरीय कार्य बल अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने में मदद लेगा और इन्हें सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

इस पहल का उद्देश्य ऐसी सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली विकसित करना है, जो सुरक्षित होने के साथ पारदर्शी, निष्पक्ष, सुलभ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। परीक्षा व्यवस्था में सुधार का सीधा असर लाखों विद्यार्थियों और उम्मीदवारों पर पड़ता है। ऐसे में सरकार की ओर से व्यापक सार्वजनिक भागीदारी के जरिए सुझाव मांगना परीक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

 

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