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मीडिया के लिए नई एडवाइजरी जारी, हिंसक दृश्य और भ्रामक खबरों पर सख्ती

इसके साथ ही संपादकीय निगरानी को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है। चैनलों को अपनी खबरों और कार्यक्रमों की जांच के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता है, ताकि प्रसारण से पहले संभावित गलतियों और नियमों के उल्लंघन की पहचान की जा सके। जिम्मेदार संपादकीय प्रक्रिया से गलत सूचना फैलने और संवेदनशील मामलों में अनुचित प्रस्तुति की आशंका कम हो सकती है।

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Gauravshali Bharat News
  • October 21, 2026 6:30 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश के सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को प्रसारण के दौरान निर्धारित नियमों और प्रोग्राम कोड का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले चैनलों के खिलाफ केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस निर्देश का उद्देश्य समाचारों और अन्य कार्यक्रमों के प्रसारण में जिम्मेदारी सुनिश्चित करना, संवेदनशील मामलों में सावधानी बरतना और दर्शकों तक तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना है।

मंत्रालय की एडवाइजरी में समाचार चैनलों को रिपोर्टिंग के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। खासतौर पर आतंकवाद विरोधी अभियानों और सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों की लाइव कवरेज को लेकर सावधानी बरतने पर जोर दिया गया है। ऐसे अभियानों के दौरान प्रसारित होने वाली जानकारी का असर सुरक्षा बलों की रणनीति और अभियान की सफलता पर पड़ सकता है। इसलिए चैनलों से अपेक्षा की गई है कि वे ऐसी गतिविधियों का सीधा प्रसारण करने से बचें, जिनसे सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा होने की आशंका हो।

एडवाइजरी में हिंसा से जुड़े दृश्यों के प्रसारण को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। चैनलों को सलाह दी गई है कि वे किसी घटना की रिपोर्टिंग करते समय खून-खराबे, क्रूरता या परेशान करने वाले दृश्यों को अनावश्यक रूप से न दिखाएं। समाचारों का उद्देश्य लोगों को घटनाओं की जानकारी देना होना चाहिए, न कि सनसनी पैदा करना। खासकर बच्चों और संवेदनशील दर्शकों पर ऐसे दृश्यों के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए संपादकीय स्तर पर उचित निर्णय लेने की जरूरत बताई गई है।

मंत्रालय ने यौन अपराधों के पीड़ितों की निजता की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया है। चैनलों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि रिपोर्टिंग के दौरान पीड़ितों की पहचान उजागर न हो। नाम, तस्वीर, पता या ऐसी कोई अन्य जानकारी प्रसारित करने से बचना जरूरी है, जिससे पीड़ित की पहचान सामने आ सकती है। इस तरह की सावधानी पीड़ितों की गरिमा और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए अहम मानी जाती है।

भारत के नक्शे के इस्तेमाल को लेकर भी चैनलों को सतर्क रहने को कहा गया है। मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि प्रसारण में देश के सही और आधिकारिक नक्शों का ही उपयोग किया जाए। नक्शों में किसी भी प्रकार की गलत प्रस्तुति दर्शकों के बीच भ्रम पैदा कर सकती है। इसलिए ग्राफिक्स, समाचार प्रस्तुतियों और अन्य दृश्य सामग्री तैयार करते समय तथ्यात्मक शुद्धता बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

Gauravshali Bharatएडवाइजरी में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाली सामग्री और राष्ट्र-विरोधी प्रसारण से बचने की आवश्यकता पर भी ध्यान दिलाया गया है। चैनलों से अपेक्षा की गई है कि वे संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग में संतुलन बनाए रखें और ऐसी सामग्री प्रसारित न करें, जिससे समुदायों के बीच तनाव या वैमनस्य बढ़ने की आशंका हो। समाचारों की प्रस्तुति में तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल महत्वपूर्ण बताया गया है।

मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित टूल्स के उपयोग को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। समाचार तैयार करने, तस्वीरें बनाने, वीडियो संपादित करने या दृश्य सामग्री प्रस्तुत करने में एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में गलत, भ्रामक या वास्तविक प्रतीत होने वाली कृत्रिम सामग्री प्रसारित होने का जोखिम भी रहता है। इसलिए चैनलों को एआई से तैयार सामग्री की जांच करने और उसे प्रसारित करने से पहले उसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने की जरूरत है।

इसके साथ ही संपादकीय निगरानी को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है। चैनलों को अपनी खबरों और कार्यक्रमों की जांच के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता है, ताकि प्रसारण से पहले संभावित गलतियों और नियमों के उल्लंघन की पहचान की जा सके। जिम्मेदार संपादकीय प्रक्रिया से गलत सूचना फैलने और संवेदनशील मामलों में अनुचित प्रस्तुति की आशंका कम हो सकती है।

कुल मिलाकर, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की यह एडवाइजरी निजी टीवी चैनलों को प्रसारण संबंधी नियमों की याद दिलाने के साथ पत्रकारिता में जिम्मेदारी, सटीकता और संवेदनशीलता बनाए रखने पर केंद्रित है। नियमों का उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। ऐसे में चैनलों के लिए जरूरी होगा कि वे समाचारों की तेज प्रस्तुति के साथ उनकी विश्वसनीयता, दर्शकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े पहलुओं का भी ध्यान रखें।

 

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