केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित परेड में पुलिसकर्मियों के योगदान, उनके बलिदान और देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने आने वाली चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि पुलिस की नौकरी जिम्मेदारी और समर्पण से भरी होती है, जिसमें जवानों को कई बार अपने परिवार और निजी जीवन से दूर रहकर देश की सेवा करनी पड़ती है। इस दौरान उन्होंने कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा की स्थिति में आए बदलावों का भी उल्लेख किया।
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में लंबे समय तक तीन क्षेत्र आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती बने रहे। इनमें जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्य और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाके शामिल थे। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, सरकार के प्रयासों और विभिन्न स्तरों पर किए गए समझौतों के बाद परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला है। शाह के मुताबिक, कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण पाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जबकि पूर्वोत्तर में शांति स्थापित करने के लिए किए गए समझौतों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में कई शांति समझौतों के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटने का रास्ता चुना है। उन्होंने इसे क्षेत्र में स्थिरता और शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने लंबे समय से चली आ रही नक्सल समस्या से निपटने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने सुरक्षा बलों के प्रयासों को आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने के व्यापक अभियान का हिस्सा बताया।
अपने भाषण में शाह ने पुलिस सेवा की कठिनाइयों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाते हैं, लेकिन पुलिसकर्मी अक्सर इन अवसरों पर भी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों को लगातार निभानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय परिवार से दूर रहकर राष्ट्र की सेवा में लगाना एक बड़ी जिम्मेदारी है।
Speaking on the occasion of the ‘Police Commemoration Day’ in National Police Memorial, New Delhi. https://t.co/Mqqb1gwY0l
— Amit Shah (@AmitShah) October 21, 2026
कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने 21 अक्टूबर 1959 की उस घटना को भी याद किया, जिसने पुलिस स्मृति दिवस की परंपरा को विशेष महत्व दिया। उन्होंने बताया कि लद्दाख के दुर्गम हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों के हमले का सामना करते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 10 जवान शहीद हो गए थे। शाह ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और गंभीर खतरे के बावजूद जवानों ने देश की सीमा की रक्षा के लिए मुकाबला किया। उनके बलिदान को याद करते हुए हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देना और उनके योगदान को याद करना है। इस अवसर पर देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। पुलिसकर्मियों की भूमिका केवल अपराध पर नियंत्रण रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा, आपातकाल, भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील परिस्थितियों में नागरिकों की सहायता करना भी उनके कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अमित शाह ने अपने संबोधन के जरिए पुलिस बलों के समर्पण और त्याग को रेखांकित किया। कार्यक्रम में शहीद जवानों की स्मृति के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े प्रयासों और चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। पुलिस स्मृति दिवस हर साल उन कर्मियों को याद करने का अवसर देता है, जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राण न्योछावर किए और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।