नयी दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले को लेकर सुनवाई सूचीबद्ध कराने की कोशिश पर मुख्य न्यायाधीश ने एक वकील को फटकार लगाई। खबरों के मुताबिक, वकील ने राहुल गांधी के उस हालिया बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और जानकारी साझा कर रहे हैं। वकील इसी आधार पर संपत्ति से जुड़े मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराना चाहते थे।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इस दलील पर सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पूछा कि क्या वकील ने इस विषय पर किसी न्यूज चैनल से बात की है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि मामले को उठाने के पीछे कोई स्पष्ट आधार या ठोस तर्क दिखाई नहीं देता। अदालत की टिप्पणी से संकेत मिला कि केवल मीडिया में चर्चा या किसी सार्वजनिक बयान के आधार पर किसी मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की मांग पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
इस घटनाक्रम के दौरान CJI ने अपने स्टाफ से यह भी कहा कि अदालत में तत्काल सुनवाई के लिए मामलों को सूचीबद्ध कराने संबंधी मौखिक अनुरोधों की लाइव स्ट्रीमिंग बंद कर दी जाए। सुप्रीम कोर्ट में वकील अक्सर नियमित सुनवाई शुरू होने से पहले किसी मामले को जल्द सूचीबद्ध करने या तत्काल सुनवाई की अनुमति मांगते हैं। इस प्रक्रिया को मेंशनिंग कहा जाता है। इसमें अदालत तय करती है कि मामले को तत्काल सुनने की आवश्यकता है या नहीं।
राहुल गांधी की संपत्ति से जुड़ा मामला इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का विषय बन चुका है। इसकी शुरुआत कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों के मुकाबले अधिक संपत्ति है। इसी शिकायत के आधार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने मई 2026 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आरोपों की जांच करने और प्रगति की जानकारी देने का निर्देश दिया था।
हाई कोर्ट के इस आदेश को राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना जांच एजेंसियों को निर्देश देना उचित नहीं था। इसके बाद 17 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने हाई कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को भी निर्देश दिया कि वे हाई कोर्ट के सामने इस मामले में कोई रिपोर्ट दाखिल न करें।
सुप्रीम कोर्ट ने उस समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर भी ध्यान दिया था। अदालत का कहना था कि किसी व्यक्ति के खिलाफ निर्देश जारी करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर देना महत्वपूर्ण है। इस मामले में राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने शिकायतकर्ता और जांच एजेंसियों को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद मामले की आगे की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अधीन रही। विवाद का एक अन्य पहलू राहुल गांधी का वह बयान है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष को जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने ED, CBI और विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का भी उल्लेख किया था। यह राहुल गांधी का दावा था; उपलब्ध रिपोर्टों में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
इस तरह संपत्ति संबंधी शिकायत, हाई कोर्ट के निर्देश और सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बीच मामला कानूनी प्रक्रिया में बना हुआ है। अदालत में हालिया मेंशनिंग के दौरान हुई टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि किसी लंबित मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने के लिए कितने ठोस आधार की आवश्यकता होती है। फिलहाल संपत्ति से जुड़े आरोपों को अदालत में सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की स्थिति न्यायिक कार्यवाही और अदालत के आगामी आदेशों से स्पष्ट होगी।