भारत की ओर से यह निमंत्रण शंघाई सहयोग संगठन के सभी सदस्य देशों को भेजा गया है। कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय मिलकर कर रहे हैं। पाकिस्तान को आमंत्रित करना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले वर्ष मई में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और टकराव की स्थिति बनी थी। उसके बाद यह एक ऐसा अवसर हो सकता है, जब पाकिस्तान के किसी वरिष्ठ मंत्री को भारत में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिले। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को इस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। हालांकि, उनके भारत आने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पाकिस्तान की ओर से अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों देशों के प्रतिनिधि एक साथ नजर आएंगे या नहीं।
गौरतलब है कि भारत ने 28 अक्टूबर को घोषणा की थी कि स्थापित परंपरा के अनुसार SCO के सभी सदस्य देशों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। शंघाई सहयोग संगठन यूरेशिया क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण अंतरसरकारी संगठन है, जो राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव की पृष्ठभूमि में इस निमंत्रण को कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद दोनों देशों के संबंध और खराब हो गए थे। इस हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया था।
इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक सैन्य तनाव बना रहा। अंततः 10 मई को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बनी सहमति के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। इस घटनाक्रम के बाद से भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो सकी है। भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है। नई दिल्ली का मानना है कि SCO जैसे संगठनों को आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के साझा रणनीति अपनानी चाहिए। भारत यह भी चाहता है कि आतंकवाद को आर्थिक और अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ सभी सदस्य देश एकजुट होकर कार्रवाई करें।
ऐसे माहौल में नई दिल्ली में होने वाला सभ्यता संवाद मंच केवल सांस्कृतिक चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि पाकिस्तान इसमें हिस्सा लेने का फैसला करता है, तो दोनों देशों के प्रतिनिधियों को एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर संवाद का अवसर मिल सकता है। हालांकि, पाकिस्तान के अंतिम निर्णय तक इस संभावना पर संशय बना रहेगा।