नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि पासपोर्ट शुल्क में हाल ही में की गई 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी 14 साल बाद की गई है। सरकार का कहना है कि बीते वर्षों में सेवा संचालन, तकनीकी उन्नयन और प्रशासनिक खर्च बढ़ने के कारण पासपोर्ट फीस में संशोधन करना आवश्यक हो गया था।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सदन में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि इससे पहले वर्ष 2012 में पासपोर्ट शुल्क में बदलाव किया गया था। इसके बाद लगभग 14 वर्षों तक फीस में कोई संशोधन नहीं किया गया। अब बढ़ती लागत और आधुनिक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए नई दरें लागू की गई हैं।
सरकार ने ‘पासपोर्ट नियम, 1980’ में संशोधन करते हुए 36 पेज वाले सामान्य नए पासपोर्ट की आवेदन फीस ₹1,500 से बढ़ाकर ₹2,500 कर दी है। नई शुल्क दरें 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं।
राज्य मंत्री ने कहा कि पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाओं की लागत, संचालन व्यवस्था और सेवा वितरण प्रणाली की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। इसी समीक्षा के आधार पर पासपोर्ट शुल्क में संशोधन किया गया है। उन्होंने बताया कि पासपोर्ट फीस में इससे पहले 1971, 1980, 1993, 2002 और 2012 में बदलाव किया गया था और अब 2026 में नई दरें लागू की गई हैं।
सरकार ने बताया कि देश में पासपोर्ट सेवाओं को और अधिक आधुनिक एवं सुरक्षित बनाने के लिए पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम वर्ज़न 2.0 और ई-पासपोर्ट जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। इन नई तकनीकों से पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बनी है।
लोकसभा में एक अन्य प्रश्न के उत्तर में विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंधों से छूट 26 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई है। सरकार इस विषय पर संबंधित देशों और पक्षों के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि परियोजना पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
उन्होंने कहा कि चाबहार बंदरगाह भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) वर्ष 2018 से अपनी सहायक कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) के माध्यम से इस बंदरगाह का संचालन कर रही है।
मंत्री ने यह भी बताया कि 13 मई 2024 को भारत और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत भारत ने इस परियोजना के लिए 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर की अपनी वित्तीय प्रतिबद्धता पूरी कर दी है।