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हामिद अंसारी के बयान पर सियासी घमासान, बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस की वर्तमान राजनीति में पहले की तुलना में अधिक वामपंथी झुकाव दिखाई देता है और अंसारी द्वारा नेहरू के पुराने संदर्भ का इस्तेमाल किए जाने से बीजेपी को कांग्रेस की वैचारिक दिशा पर सवाल उठाने का

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  • September 21, 2026 12:15 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक हालिया भाषण में जवाहरलाल नेहरू से जुड़े एक पुराने संदर्भ का जिक्र किए जाने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर बीजेपी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की मौजूदा वैचारिक दिशा पर सवाल उठाते हुए अंसारी की टिप्पणियों की आलोचना की।

यह विवाद नई दिल्ली में आयोजित एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान अंसारी के संबोधन के बाद सामने आया। अपने भाषण में उन्होंने दिवंगत लेखक और संविधान विशेषज्ञ एजी नूरानी की किताब The RSS: A Menace to India का उल्लेख किया। अंसारी ने पुस्तक की प्रस्तावना में दर्ज एक ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला देते हुए बताया कि नूरानी ने पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया के रिकॉर्ड का उल्लेख किया था। इस संदर्भ के अनुसार, एक आधिकारिक बैठक में नेहरू ने भारत के सामने कम्युनिज्म और हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से जुड़े खतरों पर विचार व्यक्त किए थे।

अंसारी ने इस ऐतिहासिक संदर्भ को मौजूदा भारत की राजनीति से भी जोड़ा। उन्होंने नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच अंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की राजनीतिक दिशा को लेकर इस समय अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। उनके भाषण का एक प्रमुख विषय यह था कि राष्ट्रवाद की अवधारणा को धर्म और नागरिकता के संदर्भ में किस तरह देखा जा रहा है।

अंसारी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की वर्तमान राजनीति में पहले की तुलना में अधिक वामपंथी झुकाव दिखाई देता है और अंसारी द्वारा नेहरू के पुराने संदर्भ का इस्तेमाल किए जाने से बीजेपी को कांग्रेस की वैचारिक दिशा पर सवाल उठाने का आधार मिलता है। त्रिवेदी ने इस मुद्दे को राहुल गांधी और कांग्रेस की मौजूदा राजनीति से भी जोड़ने की कोशिश की। हालांकि, उनके ये बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया और उनकी पार्टी की व्याख्या के रूप में देखे जाने चाहिए।

इस पूरे विवाद में यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि अंसारी ने नेहरू से जुड़े कथन को अपने व्यक्तिगत दावे के रूप में पेश करने के बजाय एजी नूरानी की पुस्तक में दिए गए संदर्भ और जगत सिंह गुंडेविया के रिकॉर्ड के हवाले से सामने रखा था। इसलिए बहस केवल अंसारी के बयान तक सीमित नहीं रही, बल्कि नेहरू के ऐतिहासिक विचारों, राष्ट्रवाद की अवधारणा और आज की भारतीय राजनीति के बीच संबंध को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

सुधांशु त्रिवेदी ने अपने बयान में हामिद अंसारी की टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अंसारी के बयान से कांग्रेस की वैचारिक दिशा को लेकर बीजेपी की ओर से उठाए जाने वाले सवालों को बल मिलता है। इस राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद हामिद अंसारी के बयान को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच वैचारिक बहस एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है।

फिलहाल इस मुद्दे पर बीजेपी की ओर से कांग्रेस की विचारधारा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि अंसारी के भाषण का मूल फोकस एजी नूरानी के विचारों, राष्ट्रवाद और भारत में नागरिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बहस पर था।

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