नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार ज्ञानेश कुमार को बचा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी निष्पक्षता और लोकतंत्र से जुड़े सवालों को उठाना जारी रखेगा। राहुल गांधी के मुताबिक, इंडिया गठबंधन के नेता इन मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में निष्पक्ष चुनाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने से जुड़ी है।
सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ से पहले राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए की गई पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। राहुल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में राजधानी में जिस तरह सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोकतंत्र और न्याय से जुड़े इस मुद्दे को विपक्ष कितना महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के लिए उचित स्थान मांगने के बावजूद विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर भारतीय लोकतंत्र तथा चुनावी निष्पक्षता से जुड़ी चिंताओं से अवगत कराया था। उनके अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें इस मामले में याचिका दायर करने को कहा है। इसी आधार पर इंडिया गठबंधन के नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर कानूनी रास्ते से अपनी बात रखने की तैयारी कर रहे हैं। राहुल ने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
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— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 12, 2026
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्हें चुनावी व्यवस्था से जुड़ी जानकारी विभिन्न स्तरों से मिल रही है। उन्होंने कहा कि करीब 200 अधिकारी उन्हें सूचनाएं दे रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इन अधिकारियों की पहचान या उनके द्वारा दी गई सूचनाओं के विस्तृत प्रमाण सार्वजनिक रूप से नहीं बताए। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज और व्यवहार पर भी सवाल उठाए तथा आरोप लगाया कि कई लोग उनकी भूमिका को लेकर चिंता जता रहे हैं। इन दावों पर संबंधित अधिकारियों और चुनाव आयोग का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिल रही है कि कुछ पुलिसकर्मी युवाओं पर कार्रवाई करने के निर्देशों से परेशान हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती जा रही है, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों को कथित तौर पर छूट दी जा रही है। ये आरोप राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों का जवाब और उपलब्ध साक्ष्य अहम होंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्षी दलों को विरोध प्रदर्शन के लिए जगह मिलने में परेशानी हो रही है। उनके मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जाने या राजघाट पहुंचने के दौरान भी कार्यकर्ताओं को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। राहुल गांधी ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस के सामने भी ऐसी परिस्थितियां हैं, जिनमें उसे राजनीतिक विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है और विपक्ष अपनी मांगों को सामने रखने के लिए आगे भी प्रयास करेगा।
राहुल गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग तब तक जारी रहेगी, जब तक विपक्ष को इस मुद्दे पर न्याय नहीं मिलता। उनके मुताबिक, इंडिया गठबंधन का प्रस्तावित मार्च लोकतंत्र और न्याय के लिए है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दाखिल करता है, उसमें कौन-से आधार प्रस्तुत किए जाते हैं और अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर कानूनी प्रक्रिया तथा सभी संबंधित पक्षों के जवाब अहम रहेंगे।