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RBI ने बैंकों और NBFC के लिए ब्याज दर नियमों में समानता का मसौदा जारी किया

1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए ऋण पर ब्याज दर तय करने के नियमों में समानता लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को ‘भारतीय रिजर्व बैंक (ऋण एवं अग्रिम पर ब्याज दर) दिशानिर्देश, […]

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  • August 13, 2026 4:35 am IST, Published 30 minutes ago

1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए ऋण पर ब्याज दर तय करने के नियमों में समानता लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को ‘भारतीय रिजर्व बैंक (ऋण एवं अग्रिम पर ब्याज दर) दिशानिर्देश, 2026’ का मसौदा जारी किया। प्रस्तावित नियमों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है।

RBI के मुताबिक, मौजूदा समय में ऋण पर ब्याज दर से जुड़े नियामकीय नियम मुख्य रूप से वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होते हैं, जबकि NBFC के लिए ब्याज दर से संबंधित व्यवस्था मुख्यतः आचरण नियमों पर आधारित है। नए मसौदे के जरिए सभी विनियमित संस्थाओं के लिए ब्याज दर निर्धारण को लेकर एक समान और व्यापक व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

फिक्स्ड और फ्लोटिंग दोनों तरह के लोन पर लागू होंगे नियम

प्रस्तावित दिशानिर्देशों में स्थिर (Fixed) और परिवर्तनशील (Floating) दोनों तरह के ऋणों पर ब्याज दर तय करने के लिए सिद्धांत आधारित ढांचा तैयार करने की बात कही गई है। यह व्यवस्था संबंधित वित्तीय संस्था के कारोबार की प्रकृति, आकार और जटिलता को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाएगी।

RBI ने कहा है कि नई व्यवस्था में ऋण की कीमत तय करने से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाएगा। इसमें सूक्ष्म-वित्त ऋण (Microfinance Loans) भी शामिल होंगे।

ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया होगी स्पष्ट

मसौदे के अनुसार, प्रत्येक विनियमित संस्था की ब्याज दर नीति में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट रूप से शामिल करना होगा। इनमें ब्याज दर निर्धारित करने की पद्धति, आंतरिक मानकों को तय करने की प्रक्रिया और जोखिम के आधार पर ब्याज दर में जोड़े जाने वाले अतिरिक्त हिस्से यानी Risk Premium की व्यवस्था शामिल है।

इसके अलावा अलग-अलग श्रेणी के ऋणों के लिए ब्याज दर तय करने के नियम और ऋण की कीमत निर्धारित करने से जुड़े अधिकारों एवं जिम्मेदारियों का बंटवारा भी नीति में स्पष्ट करना होगा।

सिर्फ घरेलू कारोबार पर लागू होंगे प्रस्तावित नियम

RBI के मसौदे के मुताबिक, प्रस्तावित दिशानिर्देश विनियमित संस्थाओं के सिर्फ घरेलू कारोबार पर लागू होंगे। इसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार की वित्तीय संस्थाओं के लिए ब्याज दर निर्धारण में पारदर्शिता और एकरूपता बढ़ाना है।

यह कदम RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से ब्याज दर संबंधी नियमों में समानता लाने की घोषणा के बाद उठाया गया है।

11 सितंबर तक मांगे सुझाव

भारतीय रिजर्व बैंक ने मसौदा दिशानिर्देशों पर आम जनता, बैंकों, NBFC और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक पक्ष 11 सितंबर 2026 तक अपने सुझाव और टिप्पणियां RBI को भेज सकते हैं।

प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद बैंकों और NBFC के लिए ऋण की ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता और एकरूपता आने की उम्मीद है। इससे अलग-अलग प्रकार के ऋणों की कीमत तय करने में संस्थानों की जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ सकती है।

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