नई दिल्ली: हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों और करीबियों में शोक की लहर है। 75 वर्ष की उम्र में गोवा के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके अचानक निधन की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक जगत, फिल्म इंडस्ट्री और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी नाना पाटेकर के निधन पर भावुक संदेश साझा करते हुए उनके साथ अपने व्यक्तिगत रिश्ते और उनसे जुड़ी कई यादों को सामने रखा।
स्मृति ईरानी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दुनिया नाना पाटेकर को इसी नाम से जानती थी, लेकिन उनके लिए वह हमेशा ‘दादा’ थे। उनके मुताबिक नाना के साथ उनका रिश्ता किसी औपचारिक परिचय तक सीमित नहीं था। उनके बीच अपनापन था और बातचीत में किसी तरह की औपचारिकता नहीं रहती थी। स्मृति ने बताया कि नाना के फोन कई बार अचानक आ जाते थे, लेकिन उनकी हर कॉल उनके लिए बेहद खास होती थी। स्मृति ईरानी ने नाना की उस परिचित आवाज को भी याद किया, जिसमें वह सहज अंदाज में पूछते थे कि वह कहां हैं। उन्होंने कहा कि उन बातचीत में न तो दिखावा होता था और न किसी तरह की औपचारिकता। यही सहजता नाना के व्यक्तित्व की खास पहचान थी। पर्दे पर बेहद प्रभावशाली और कई बार कठोर नजर आने वाले नाना निजी जिंदगी में अपने करीबी लोगों के साथ बेहद सरल और आत्मीय थे।
अपने संदेश में स्मृति ईरानी ने एक बात का खास तौर पर जिक्र किया, जो उनके लिए बेहद भावुक करने वाली है। उन्होंने कहा कि उनके पास नाना पाटेकर के साथ कोई तस्वीर नहीं है। इसकी वजह यह थी कि उन्होंने कभी कल्पना ही नहीं की थी कि ऐसा दिन आएगा जब उनके साथ बिताए पलों को याद करने के लिए तस्वीरों की जरूरत पड़ेगी। अब जब नाना नहीं हैं, तो वही यादें उनके पास रह गई हैं। स्मृति ने बताया कि वह कई बार खुद नाना को फोन कर देती थीं। इसकी वजह भी बेहद खास होती थी। फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे कुछ युवा कलाकार नाना के बड़े प्रशंसक थे और स्मृति कभी-कभी उनकी उनसे बात करा देती थीं। नाना अपने सख्त और बेबाक व्यक्तित्व के बावजूद ऐसे मौकों पर प्रशंसकों से बेहद आत्मीयता से बात करते थे। वह युवा कलाकारों को निराश नहीं करते थे और पूरे अपनत्व के साथ बातचीत करते थे।
Dada. That’s what I called him, while the world knew him as Nana Patekar.
His calls were as random as they were precious. No formalities, no pleasantries. Just that familiar voice – “Kahan hai re?”
We barely ever photographed our moments together. Perhaps because one could never imagine there would come a day when photographs would be all I am left with.
I would call him out of the blue, sometimes just to put him on the phone with young talent who admired the legend. And he would oblige, with all the warmth that lay beneath that unmistakably gruff exterior.
Today, among the memories I hold closest is one of him cooking for me. No special occasion . Just Dada, being Dada.
Our last conversation still echoes in my ears.
“Aa re Pune, kadhi yeshil?”
Come to Pune, when will you visit?I said, “Soon.”
Guess was not soon enough.
See you on the other side, Dada. ❤️
— Smriti Z Irani (@smritiirani) October 8, 2026
नाना के साथ जुड़ी एक और निजी याद स्मृति ने साझा की। उन्होंने बताया कि एक अवसर पर नाना उनके लिए खाना बना रहे थे। इसमें किसी विशेष कार्यक्रम या औपचारिक मुलाकात का संदर्भ नहीं था। वह अपने सहज अंदाज में खाना बना रहे थे। स्मृति के लिए यह घटना इसलिए खास बन गई क्योंकि अब वह उस समय को एक ऐसी स्मृति के रूप में देख रही हैं, जिसे दोबारा जी पाना संभव नहीं है। स्मृति ईरानी ने नाना पाटेकर के साथ हुई अपनी आखिरी बातचीत को भी याद किया। उन्होंने बताया कि नाना ने उनसे पुणे आने के बारे में पूछा था। बातचीत बेहद सामान्य थी और स्मृति ने उनसे जल्द मिलने का भरोसा दिया था। अब उन्हें अफसोस है कि वह ‘जल्द’ कभी नहीं आ सकी। यही अधूरी रह गई मुलाकात उनके संदेश का सबसे भावुक हिस्सा बन गई।
नाना पाटेकर का जाना इसलिए भी बड़ा नुकसान माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने हिंदी और मराठी दोनों सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। कई दशकों तक सक्रिय रहे नाना ने गंभीर, सामाजिक, राजनीतिक, एक्शन और हास्य से जुड़े किरदारों को प्रभावशाली ढंग से निभाया। उनकी संवाद अदायगी, आवाज और अभिनय की स्वाभाविकता ने उन्हें अपने दौर के सबसे विशिष्ट कलाकारों में शामिल किया। फिल्मों से बाहर भी नाना पाटेकर का व्यक्तित्व लोगों को प्रभावित करता रहा। सामाजिक कार्यों और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए उनकी सक्रियता का भी उल्लेख अक्सर होता रहा है। यही वजह है कि उनके निधन के बाद उन्हें सिर्फ एक अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और जमीन से जुड़े इंसान के तौर पर भी याद किया जा रहा है।
नाना पाटेकर के सम्मान में उनका अंतिम संस्कार शासकीय सम्मान के साथ किए जाने की जानकारी सामने आई है। उनके पार्थिव शरीर को गोवा से मुंबई स्थित उनके आवास पर लाया जाएगा। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नाना के प्रशंसकों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के लिए यह समय बेहद भावुक है। पर्दे पर अपनी दमदार मौजूदगी से करोड़ों दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले नाना पाटेकर अब यादों में रहेंगे, लेकिन उनकी फिल्मों और किरदारों के जरिए उनकी आवाज लंबे समय तक दर्शकों तक पहुंचती रहेगी।