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महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त,दिल्ली पुलिस तलब

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन स्थलों पर यह पहचानना कई बार कठिन हो सकता है कि कौन व्यक्ति पत्रकार के रूप में काम कर रहा है और कौन सोशल मीडिया के लिए वीडियो बना रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी महिला के साथ अभद्र व्यवहार नहीं होना चाहिए...

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • October 15, 2026 5:00 pm IST, Published 38 minutes ago

नई दिल्ली: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को तलब किया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि महिला पत्रकारों पर हमले के आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित की जा सकती है। अदालत की इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थलों पर पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने महिला पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि पत्रकार विरोध-प्रदर्शनों के दौरान घटनास्थल पर जाकर रिपोर्टिंग करते हैं, लेकिन कई बार उन्हें कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट और बाध्यकारी दिशानिर्देश बनाए जाएं, ताकि वे बिना किसी डर के अपना पेशेवर काम कर सकें।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने इंदिरा जयसिंह से दो अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में दस्तावेज जमा कराने को कहा है। एक लिफाफे में उन महिला पत्रकारों के नाम और संबंधित विवरण देने को कहा गया है, जिन्होंने कथित हमलों की शिकायत की है। दूसरे लिफाफे में उन सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीशों और महिला पुलिस अधिकारियों के नाम मांगे गए हैं, जिन्हें प्रस्तावित जांच समिति में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।

अदालत के इस निर्देश का उद्देश्य मामले से संबंधित जानकारी व्यवस्थित रूप से जुटाना और जांच के लिए उपयुक्त व्यक्तियों के नामों पर विचार करना है। हालांकि, समिति के गठन और उसके स्वरूप को लेकर अंतिम निर्णय अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, ताकि पुलिस का पक्ष भी सुना जा सके।

सुनवाई के दौरान इंदिरा जयसिंह ने एक महिला पत्रकार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, संबंधित पत्रकार के खिलाफ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने अदालत से उस महिला पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इस मामले में आरोपों और प्राथमिकी से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड तथा जांच के आधार पर होनी है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन स्थलों पर यह पहचानना कई बार कठिन हो सकता है कि कौन व्यक्ति पत्रकार के रूप में काम कर रहा है और कौन सोशल मीडिया के लिए वीडियो बना रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी महिला के साथ अभद्र व्यवहार नहीं होना चाहिए। इसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं और उनकी गरिमा तथा सुरक्षा का ध्यान रखा जाना जरूरी है।

तुषार मेहता ने अदालत से इस विषय पर व्यापक और सामान्य निर्देश जारी करने से बचने का अनुरोध किया। सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों के बीच महिला पत्रकारों की सुरक्षा, पुलिस की जिम्मेदारी और विरोध-प्रदर्शन के दौरान रिपोर्टिंग की परिस्थितियों पर चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संकेत दिया कि आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित करने पर विचार किया जा सकता है।

इस मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की भूमिका घटनाओं को जनता तक पहुंचाने की होती है। विरोध-प्रदर्शन जैसे संवेदनशील हालात में पत्रकारों को सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है, ताकि वे बिना दबाव के तथ्यों की रिपोर्टिंग कर सकें। साथ ही, किसी भी आरोप की जांच निष्पक्ष तरीके से होना और सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना भी आवश्यक है।

अब इस मामले में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के पक्ष, अदालत के अगले निर्देशों और प्रस्तावित समिति के गठन पर नजर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही से यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं और कथित घटनाओं की जांच किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।

 

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