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ECI पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फैसलों की प्रक्रिया पर मांगी पुख्ता जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों का पक्ष देखना आवश्यक है। फिलहाल CEC के खिलाफ निलंबन का कोई अंतरिम आदेश नहीं...

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  • October 5, 2026 1:49 pm IST, Published 48 seconds ago

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने फिलहाल CEC को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया, लेकिन मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग से जुड़े कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, किसी रिपोर्ट में दी गई जानकारी पूरी तरह सही, आंशिक रूप से सही या गलत हो सकती है। इसलिए मामले में ठोस और प्रमाणित जानकारी हासिल करना जरूरी है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से इस संबंध में जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि जांच में यह सामने आता है कि आयोग के कुछ फैसले न तो सर्वसम्मति से लिए गए थे और न ही बहुमत के आधार पर, तो अदालत उन फैसलों की वैधता पर विचार कर सकती है। हालांकि, पीठ ने यह स्पष्ट किया कि वह अभी से यह मानकर नहीं चल सकती कि सभी संबंधित निर्णय अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त ने लिए थे। इसके लिए रिकॉर्ड और आधिकारिक जवाब देखना जरूरी होगा।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने CEC को अंतरिम तौर पर निलंबित करने की मांग रखी। उन्होंने चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण और निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि लंबित मामले के दौरान आयोग के फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए। अदालत ने इस दलील पर कहा कि आयोग को कानून के अनुरूप ही काम करना होगा।

मामले में याचिकाकर्ताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं को भी चुनौती दी है। याचिकाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए SIT गठित करने और SIR को गैरकानूनी घोषित करने जैसी मांगें शामिल हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों का पक्ष देखना आवश्यक है। फिलहाल CEC के खिलाफ निलंबन का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया है।

इस सुनवाई से यह साफ है कि अदालत फिलहाल आरोपों की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष देने के बजाय निर्णय प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार की जांच करना चाहती है। आगे की कार्यवाही में चुनाव आयोग का जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड अहम भूमिका निभाएंगे। यदि किसी निर्णय में कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन पाया जाता है, तो अदालत उसके प्रभाव और वैधता पर आगे विचार कर सकती है।

 

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