नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ मामले की सुनवाई करेगी। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। याचिकाओं में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों, दिशा-निर्देशों और चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम में किए गए बदलावों को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का मुख्य सवाल यह है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले उन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो संविधान और कानून के तहत बहु-सदस्यीय निर्वाचन आयोग को सामूहिक रूप से प्राप्त हैं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR से संबंधित कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। इसी आधार पर संबंधित फैसलों, निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को असंवैधानिक और निरस्त करने की मांग की गई है।
मामला 29 सितंबर को उस समय सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था, जब वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उठाया। इसके बाद अदालत ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने की बात कही थी। अब 5 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत के सामने याचिकाओं में लगाए गए आरोपों और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर प्रारंभिक सुनवाई होगी।
इन याचिकाओं में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। एक याचिका में करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के दावे की जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल गठित करने की मांग की गई है। साथ ही ECINet और ERONet जैसे चुनावी डिजिटल सिस्टम का फॉरेंसिक ऑडिट कराने, सर्वर लॉग, डेटाबेस और संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग और बैठकों के कार्यवृत्त अदालत के सामने मंगाए जाने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवादित फैसले किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत लिए गए। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच और कथित वैधानिक उल्लंघनों के लिए कार्रवाई की मांग भी याचिकाओं में की गई है।
मुख्य याचिकाओं में से एक शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल की गई है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और निर्वाचन आयोग की आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से संबंधित कुछ निर्णय और डिजिटल बदलाव आयोग के अन्य सदस्यों की सहमति के बिना किए गए।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों को लेकर कई बार लिखित आपत्ति या असहमति दर्ज की। इन दावों को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि आयोग ने आंतरिक मतभेदों को संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और विवादित फैसलों पर उठाए गए आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है।
एक अन्य याचिका में सुनवाई लंबित रहने तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य करने से रोकने की मांग भी की गई है। साथ ही SIR और उससे जुड़े कथित फैसलों को रद्द करने तथा मूल फॉर्म-6 को बहाल करने की मांग उठाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मामला केवल SIR की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और उसके सदस्यों की सामूहिक भूमिका से भी जुड़ा है। हालांकि, याचिकाओं में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक जांच के स्तर पर हैं और उन पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही सामने आएगा।