नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण बढ़ने का समय नजदीक आते ही सड़कों पर जमा धूल चिंता बढ़ाने लगी है। दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों और फ्लाईओवर पर धूल की मोटी परत जमा है। वाहनों के गुजरने के दौरान यही धूल हवा में उड़कर आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रही है।
प्रदूषण की समस्या के लिए केवल रिंग रोड ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि शहर के कई अन्य प्रमुख मार्गों पर सफाई की कमी और टूटी सड़कों के कारण भी धूल का स्तर बढ़ रहा है।
न्यू रोहतक रोड की स्थिति विशेष रूप से खराब बताई जा रही है। रानी झांसी रोड टी-प्वाइंट से जखीरा तक करीब छह किलोमीटर के हिस्से में सड़क पर धूल का जमाव है। वाहन चालकों को इस मार्ग से गुजरते समय करीब 20 से 25 मिनट तक धूल भरे माहौल का सामना करना पड़ता है।
इससे सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। आसपास रहने वाले लोगों ने भी लोक निर्माण विभाग से शिकायत की है। बताया जा रहा है कि टूटी सड़क और गड्ढों को भरने के लिए डाले गए ईंटों के टुकड़े धीरे-धीरे मिट्टी में बदल गए हैं। वाहनों के गुजरने पर यह मिट्टी हवा में उड़ने लगती है।
यमुनापार के कई प्रमुख मार्ग और फ्लाईओवर भी धूल की समस्या से जूझ रहे हैं। अप्सरा बॉर्डर फ्लाईओवर, अप्सरा बॉर्डर से आनंद विहार की ओर जाने वाला फ्लाईओवर, अशोक नगर, लोनी गोलचक्कर, गोकलपुरी और शाहदरा फ्लाईओवर पर धूल जमा होने की बात सामने आई है।
इसके अलावा नारायणा, मंगोलपुरी, न्यू मोती नगर और रानी झांसी फ्लाईओवर पर भी सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नियमित सफाई नहीं होने के कारण सड़कों और फ्लाईओवर पर धूल जमा हो रही है।
मोदी मिल से कालकाजी फ्लाईओवर तक चल रहे निर्माण कार्य के कारण भी सड़क पर धूल बढ़ रही है। वहीं मथुरा रोड पर भी कई जगह धूल की समस्या देखने को मिल रही है।
दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण पहले से ही गंभीर समस्या बन जाता है। धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव, सड़कों की नियमित सफाई और निर्माण स्थलों पर धूल रोकने जैसे उपाय किए जाते हैं। हालांकि, कई इलाकों में इन उपायों का प्रभाव जमीन पर पर्याप्त नजर नहीं आ रहा है।
लोक निर्माण विभाग के पूर्व प्रमुख अभियंता दिनेश कुमार के अनुसार, अक्टूबर से ही धूल प्रदूषण रोकने की व्यवस्थाएं सड़कों पर दिखाई देनी चाहिए। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावी बनाने में मुश्किल हो सकती है।