10 अगस्त भारतीय इतिहास में खास महत्व रखता है, खासकर भारत छोड़ो आंदोलन के उस दौर के कारण जब 9 अगस्त 1942 के बाद देशभर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए थे। 10 अगस्त को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित कई इलाकों में हड़तालें, जुलूस और विरोध प्रदर्शन हुए।
8 अगस्त 1942 को मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में महात्मा गांधी ने “करो या मरो” का आह्वान किया। इसके अगले दिन गांधीजी समेत कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद आंदोलन स्वतःस्फूर्त रूप से देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गया।
10 अगस्त 1942 को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रदर्शन तेज हुए। कानपुर, पटना, वाराणसी और इलाहाबाद में हड़तालें और जुलूस निकाले गए तथा लोगों ने ब्रिटिश सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेशों की अवहेलना की।
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान छात्रों, मजदूरों और आम लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। कई जगह रेलवे लाइनें और टेलीग्राफ व्यवस्था बाधित की गई तथा सरकारी संस्थानों के खिलाफ विरोध हुआ। ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और दमन किया।
10 अगस्त हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल नेताओं के संघर्ष से नहीं, बल्कि आम जनता की भागीदारी, साहस और त्याग से हासिल हुई थी।