नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में कोर्टरूम विस्तार की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। शीर्ष अदालत परिसर में एक नए कोर्टरूम को तैयार किया जा रहा है, जिसके बाद यहां कोर्टरूम की संख्या 17 से बढ़कर 18 हो जाएगी। नए कोर्टरूम के लिए ‘कोर्ट नंबर 18’ का बोर्ड लगाए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में संवैधानिक, कानूनी और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई होती है। ऐसे में कोर्टरूम की संख्या बढ़ने से अदालत के कामकाज को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। विस्तार का मौजूदा काम पूरा होने के बाद सुनवाई के लिए एक अतिरिक्त कोर्टरूम उपलब्ध होगा। नए कोर्ट नंबर 18 का तैयार होना सुप्रीम कोर्ट के बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कोर्टरूम की संख्या बढ़ने से अलग-अलग पीठों के लिए सुनवाई की उपलब्ध जगह बढ़ेगी। इसका असर मामलों की सूची तैयार करने और सुनवाई के प्रबंधन पर भी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। इनमें संवैधानिक महत्व के मामलों के अलावा नागरिक विवाद, आपराधिक मामले, चुनाव संबंधी याचिकाएं, सरकारी नीतियों को चुनौती देने वाले मामले और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों के खिलाफ दायर अपील शामिल रहती हैं। ऐसे में अतिरिक्त कोर्टरूम अदालत के दैनिक कामकाज को बेहतर तरीके से संचालित करने में उपयोगी साबित हो सकता है।
वर्तमान व्यवस्था में 17 कोर्टरूम के जरिए सुनवाई संचालित की जा रही है। नए कोर्टरूम के जुड़ने के बाद यह संख्या 18 हो जाएगी। इससे अदालत की भौतिक क्षमता में विस्तार होगा और जरूरत के अनुसार अधिक पीठों के लिए सुनवाई की व्यवस्था की जा सकेगी। कोर्टरूम विस्तार का महत्व केवल एक अतिरिक्त कमरे तक सीमित नहीं है। न्यायिक संस्थानों में बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सीधे तौर पर प्रशासनिक क्षमता से जुड़ी होती है। पर्याप्त कोर्टरूम होने पर मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध समय और स्थान का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। इससे न्यायिक कार्यवाही को सुचारू रखने में मदद मिल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में वकील, पक्षकार और अन्य लोग भी मौजूद रहते हैं। इसलिए अदालत के बुनियादी ढांचे में विस्तार के साथ सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। डिजिटल तकनीक, ई-फाइलिंग और ऑनलाइन सुनवाई जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार के बीच भौतिक कोर्टरूम की क्षमता बढ़ाना भी न्यायिक ढांचे को मजबूत करने का हिस्सा है।नए कोर्ट नंबर 18 के लिए बोर्ड लगाए जाने की प्रक्रिया यह संकेत देती है कि विस्तार से जुड़ा काम अंतिम चरण में है।
अदालतों में लंबित मामलों को कम करना न्यायपालिका के सामने लगातार एक बड़ी चुनौती रहा है। इसके लिए केवल न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना ही नहीं, बल्कि कोर्टरूम, न्यायिक कर्मचारियों, तकनीकी सुविधाओं और अन्य जरूरी संसाधनों का पर्याप्त होना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में एक अतिरिक्त कोर्टरूम का जुड़ना संस्थागत क्षमता बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा सकता है।
आने वाले समय में नए कोर्टरूम के इस्तेमाल से सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई व्यवस्था पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। कोर्ट नंबर 18 के जुड़ने के बाद शीर्ष अदालत में एक और सुनवाई स्थल उपलब्ध होगा, जिससे न्यायिक कार्यों को व्यवस्थित करने में अतिरिक्त सुविधा मिल सकती है। इस विस्तार के साथ सुप्रीम कोर्ट के बुनियादी ढांचे में एक और महत्वपूर्ण बदलाव जुड़ जाएगा। अब 17 के बजाय 18 कोर्टरूम होने से अदालत की सुनवाई क्षमता और प्रशासनिक लचीलापन बढ़ने की उम्मीद है।