इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आम आदमी पार्टी की ओर से होशियारपुर विधानसभा सीट पर उम्मीदवार को लेकर लिया गया फैसला भी अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने हाल ही में मौजूदा विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा को दोबारा चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया है। उनके नाम की घोषणा के बाद कुलजीत सिंह बजवाड़ा ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया। दोनों घटनाओं के बीच कम समय का अंतर होने के कारण राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि होशियारपुर सीट पर टिकट को लेकर बजवाड़ा की अपनी उम्मीदें रही होंगी। ऐसे में ब्रह्म शंकर जिंपा को दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उनकी राजनीतिक रणनीति प्रभावित हुई हो सकती है। हालांकि, यह केवल राजनीतिक अटकलें हैं। बजवाड़ा ने अपने इस्तीफे के पीछे घरेलू जिम्मेदारियों को कारण बताया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जताने या पार्टी नेतृत्व के फैसले का विरोध करने की कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं की है।
ब्रह्म शंकर जिंपा को दोबारा उम्मीदवार घोषित करना आम आदमी पार्टी की ओर से मौजूदा विधायक पर भरोसा जताने के रूप में देखा जा रहा है।आम आदमी पार्टी नेतृत्व ने चुनावी मैदान में उन्हें फिर से मौका देकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। लेकिन इसके बाद बजवाड़ा का इस्तीफा स्थानीय संगठन के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। खासकर उन कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो सकती है, जो उन्हें होशियारपुर सीट के संभावित उम्मीदवार के रूप में देख रहे थे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुलजीत सिंह बजवाड़ा का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा? क्या वह किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होंगे या कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूरी बना लेंगे? फिलहाल इस संबंध में उनकी ओर से कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है। उनके भविष्य के फैसले पर होशियारपुर की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा काफी हद तक निर्भर कर सकती है।
आम आदमी पार्टी के लिए भी यह घटनाक्रम स्थानीय स्तर पर चुनौती बन सकता है। चुनाव से पहले किसी संभावित दावेदार का पार्टी छोड़ना संगठन के भीतर असंतोष की चर्चाओं को जन्म दे सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। कुल मिलाकर होशियारपुर में कुलजीत सिंह बजवाड़ा का इस्तीफा केवल एक स्थानीय नेता के पार्टी छोड़ने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और टिकट वितरण से जुड़े राजनीतिक समीकरणों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। अब सभी की नजर बजवाड़ा के अगले कदम और आम आदमी पार्टी की स्थानीय रणनीति पर रहेगी।