पितृ पक्ष 2026: आज से शुरू हुआ श्राद्ध पक्ष

 जानें श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की विधि व जरूरी नियम नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 […]

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  • September 27, 2026 7:01 am IST, Published 58 minutes ago

 जानें श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की विधि व जरूरी नियम

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से मानी जा रही है। यह अवधि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का समय होती है।

पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए तर्पण और श्राद्ध से पितरों को संतुष्टि मिलती है। अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों के अनुसार तिथियों में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार श्राद्ध की तिथि देखना उचित माना जाता है।

कैसे करें श्राद्ध?

श्राद्ध के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद पूर्वजों का स्मरण करते हुए संकल्प लिया जाता है। परंपरा के अनुसार कुश, जल, तिल और अन्य पूजा सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।

श्राद्ध कर्म में ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को भोजन या दान तथा गाय, कुत्ते और कौए को भोजन कराने की परंपरा भी कई परिवारों में है। पूजा-पद्धति परिवार की परंपरा और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

तर्पण की विधि

तर्पण में जल के साथ काले तिल अर्पित किए जाते हैं। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करने की परंपरा है। तर्पण करते समय पूर्वजों का नाम और गोत्र लेकर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।

पिंडदान कैसे किया जाता है?

पिंडदान में सामान्य तौर पर चावल, तिल और अन्य सामग्री से पिंड बनाए जाते हैं। इसके बाद विधि-विधान से उन्हें पितरों को समर्पित किया जाता है। पिंडदान की विस्तृत विधि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग हो सकती है। गया, प्रयागराज, हरिद्वार और अन्य तीर्थस्थलों पर भी पिंडदान की विशेष परंपराएं हैं।

पितृ पक्ष में किन बातों का रखें ध्यान?

  • श्राद्ध कर्म श्रद्धा और विधि-विधान से करें।
  • अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि निर्धारित करें।
  • तर्पण और पिंडदान की विधि के लिए योग्य आचार्य या पुरोहित से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
  • इस अवधि में जरूरतमंदों को भोजन और दान देने की परंपरा है।
  • कई परिवार पितृ पक्ष में शुभ मांगलिक कार्यों से परहेज करते हैं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या रखने पर जोर दिया जाता है।

ध्यान दें: श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की विधि क्षेत्र, परिवार और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी विशेष कर्म के लिए स्थानीय विद्वान या पुरोहित से सलाह लेना उचित रहेगा।

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