चेन्नई: तमिलनाडु सरकार अपने पहले पूर्ण बजट में शिक्षा और युवाओं को केंद्र में रखकर कई नई योजनाओं की घोषणा कर सकती है। मुख्यमंत्री थलपति विजय के नेतृत्व वाली सरकार 5 अगस्त को राज्य का बजट पेश करने जा रही है। बजट से पहले सामने आ रही जानकारी के अनुसार, सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों, छोटे किसानों के परिवारों तथा उच्च शिक्षा हासिल करने के इच्छुक युवाओं के लिए कई अहम प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य शिक्षा को अधिक सुलभ बनाना और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बजट में सरकारी विद्यालयों से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले उन छात्रों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना लाई जा सकती है, जो आगे सरकारी कॉलेजों में प्रवेश लेते हैं। प्रस्तावित योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को एकमुश्त 8,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा सकती है। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी शिक्षण संस्थानों में दाखिले को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को शुरुआती खर्चों में राहत मिलेगी।
शिक्षा के साथ-साथ किसानों के परिवारों को भी इस बजट में विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, जिन किसानों के पास दो एकड़ से कम कृषि भूमि है, उनके बच्चों को उच्च शिक्षा निःशुल्क उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है। यदि इस योजना को मंजूरी मिलती है, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण और सीमांत किसान परिवारों के विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है।
उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता को आसान बनाने की दिशा में भी सरकार महत्वपूर्ण कदम उठा सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, स्नातक से लेकर शोध स्तर तक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण बिना किसी गारंटी के उपलब्ध कराया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों की मदद करना है जो आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
सरकार इन प्रस्तावों को राज्य के दीर्घकालिक शिक्षा विकास कार्यक्रम का हिस्सा मान रही है। बताया जा रहा है कि आने वाले वर्षों के लिए तैयार किए जा रहे शिक्षा रोडमैप में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वित्तीय सहायता और सरकारी संस्थानों को मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहेगा।
शिक्षा के अलावा स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना में भी बदलाव की तैयारी की जा रही है। चर्चा है कि बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी परोसने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। इस सुझाव पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे पोषण सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।
हालांकि, इन सभी योजनाओं की आधिकारिक पुष्टि बजट पेश होने के बाद ही होगी। फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। यदि प्रस्तावित योजनाएं बजट का हिस्सा बनती हैं, तो शिक्षा, सामाजिक कल्याण और ग्रामीण परिवारों के लिए यह बजट महत्वपूर्ण माना जाएगा। शिक्षा में निवेश और आर्थिक सहायता से न केवल विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य में उच्च शिक्षा का दायरा भी बढ़ेगा। अब सभी की निगाहें 5 अगस्त को पेश होने वाले तमिलनाडु बजट पर टिकी हैं, जहां इन प्रस्तावों पर अंतिम फैसला सामने आएगा।