लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों के निस्तारण को लेकर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। लंबित राजस्व मामलों के निस्तारण में कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पांच तहसीलदारों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसके अलावा 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
बताया गया है कि शासन स्तर पर राजस्व मामलों की प्रगति और उनके निस्तारण की स्थिति की समीक्षा के दौरान कई अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने तथा अनियमितताओं से जुड़े आरोप सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
UP के 5 तहसीलदार निलंबित
1-अमित यादव, तहसीलदार सण्डीला ,हरदोई।
2- कृष्ण कुमार मिश्रा, तहसीलदार, देवरिया।
3- सौरभ कुमार, तहसीलदार जौनपुर।
4- रंजन वर्मा, तहसीलदार गाजीपुर।
5- अलख शुक्ला, तहसीलदार, प्रतापगढ़।
जिन पांच तहसीलदारों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है, उनमें हरदोई के सण्डीला तहसीलदार अमित यादव, देवरिया के तहसीलदार कृष्ण कुमार मिश्रा, जौनपुर के तहसीलदार सौरभ कुमार, गाजीपुर के तहसीलदार रंजन वर्मा और प्रतापगढ़ के तहसीलदार अलख शुक्ला शामिल हैं।
इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य आधार लंबित राजस्व मामलों के निस्तारण में कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप बताए जा रहे हैं। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित विभागीय जांच और उसके निष्कर्षों के आधार पर होगी।
13 तहसीलदारों/नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस निर्गत किया गया है
1- चन्द्रशेखर वर्मा, तत्कालीन तहसीलदार जनपद देवरिया सम्प्रति तहसीलदार जनपद गोरखपुर।
2- गोपाल जी, तत्कालीन नायब तहसीलदार जनपद देवरिया सम्प्रति तहसीलदार जनपद कुशीनगर।
3- रंनिरंजन कश्यप, तहसीलदार जनपद जौनपुर।
4- राकेश कुमार, तत्कालीन तहसीलदार जनपद जौनपुर सम्प्रति तहसीलदार जनपद बलरामपुर।
5- कविता ठाकुर, तत्कालीन तहसीलदार बाराबंकी सम्प्रति तहसीलदार जनपद गोण्डा।
6- देवानन्द तिवारी, तत्कालीन तहसीलदार जनपद सुल्तानपुर सम्प्रति तहसीलदार जनपद फिरोजाबाद।
7- स्नेहिल वर्मा, तत्कालीन नायब तहसीलदार जनपद अयोध्या सम्प्रति तहसीलदार जनपद लखनऊ।
8- राहुल सिंह, तहसीलदार जनपद अमेठी।
9- अनिल कुमार तहसीलदार जनपद प्रतापगढ़।
10- यजुवेन्द्र सिंह, नायब तहसीलदार जनपद लखनऊ।
11- सुखवीर सिंह, तहसीलदार जनपद लखनऊ।
12- रमाशंकर मिश्रा, नायब तहसीलदार जनपद रायबरेली।
13- शरद सिंह, तहसीलदार जनपद लखनऊ।
इन सब पर राजस्व के लंबित मामलों के निस्तारण में लापरवाही व भ्रष्टाचार के आरोप हैं
निलंबन की कार्रवाई के साथ ही शासन ने 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों से उनके कार्यक्षेत्र में लंबित राजस्व मामलों और संबंधित शिकायतों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
नोटिस पाने वालों में चन्द्रशेखर वर्मा, तत्कालीन तहसीलदार देवरिया और वर्तमान में तहसीलदार गोरखपुर; गोपाल जी, तत्कालीन नायब तहसीलदार देवरिया और वर्तमान में तहसीलदार कुशीनगर; रंनिरंजन कश्यप, तहसीलदार जौनपुर; तथा राकेश कुमार, तत्कालीन तहसीलदार जौनपुर और वर्तमान में तहसीलदार बलरामपुर शामिल हैं।
इसके अलावा कविता ठाकुर, तत्कालीन तहसीलदार बाराबंकी और वर्तमान में तहसीलदार गोण्डा; देवानन्द तिवारी, तत्कालीन तहसीलदार सुल्तानपुर और वर्तमान में तहसीलदार फिरोजाबाद; तथा स्नेहिल वर्मा, तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या और वर्तमान में तहसीलदार लखनऊ को भी नोटिस जारी किया गया है।
सूची में राहुल सिंह, तहसीलदार अमेठी; अनिल कुमार, तहसीलदार प्रतापगढ़; यजुवेन्द्र सिंह, नायब तहसीलदार लखनऊ; सुखवीर सिंह, तहसीलदार लखनऊ; रमाशंकर मिश्रा, नायब तहसीलदार रायबरेली और शरद सिंह, तहसीलदार लखनऊ के नाम भी शामिल हैं।
राजस्व मामलों के निस्तारण पर सरकार की नजर
राजस्व विभाग में तहसील स्तर पर भूमि विवाद, नामांतरण, सीमांकन, दाखिल-खारिज समेत बड़ी संख्या में मामले आते हैं। इन मामलों के समय पर निस्तारण को आम लोगों को राहत देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबे समय तक मामले लंबित रहने से संबंधित पक्षों को तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
इसी वजह से शासन की ओर से राजस्व मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की व्यवस्था को भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
कार्रवाई से विभाग में बढ़ी सख्ती
पांच तहसीलदारों के निलंबन और 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने से यह संकेत गया है कि शासन राजस्व मामलों में लापरवाही को गंभीरता से ले रहा है। अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे लंबित मामलों का निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा के अनुसार निस्तारण सुनिश्चित करें।
कारण बताओ नोटिस पाने वाले अधिकारियों को अब अपना पक्ष शासन के समक्ष रखना होगा। उनके जवाब और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय हो सकती है। वहीं निलंबित अधिकारियों के मामलों में विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी सख्त संदेश
राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती रही हैं। जमीन और राजस्व से संबंधित मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। ऐसे में अधिकारियों के खिलाफ हुई ताजा कार्रवाई को भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के प्रति सरकार के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध मानना उचित नहीं होगा। निलंबन या कारण बताओ नोटिस प्रशासनिक कार्रवाई है और संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। विभागीय जांच के अंतिम निष्कर्ष के बाद ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
निलंबित अधिकारियों के मामलों में विभागीय जांच आगे बढ़ेगी, जबकि कारण बताओ नोटिस पाने वाले अधिकारियों से उनके खिलाफ उठे सवालों पर जवाब मांगा जाएगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे भी विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
ताजा कार्रवाई से प्रदेश के तहसील स्तर पर राजस्व मामलों के निस्तारण को लेकर अधिकारियों पर जवाबदेही बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। शासन का फोकस लंबित मामलों को कम करने, शिकायतों का समयबद्ध समाधान करने और राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें अधिकारियों पर लगाए गए भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है; अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।