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यूपी में विकास की नई उड़ान, एक्सप्रेसवे संग उद्योगों को नई पहचान

लखनऊः उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, कनेक्टिविटी और निवेश को गति देने के लिए योगी सरकार ने मंगलवार को कई अहम फैसले लिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर की स्थापना, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण, गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने और […]

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  • August 25, 2026 9:13 pm IST, Published 17 minutes ago

लखनऊः उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, कनेक्टिविटी और निवेश को गति देने के लिए योगी सरकार ने मंगलवार को कई अहम फैसले लिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर की स्थापना, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण, गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने और आठ मेगा औद्योगिक इकाइयों को निवेश प्रोत्साहन देने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
इन फैसलों के तहत अकेले तीन बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स पर करीब 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक का संभावित व्यय होगा, जबकि आठ मेगा औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से करीब 2,901.97 करोड़ रुपये के निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स और रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

सुल्तानपुर में 272.25 करोड़ से बनेगा औद्योगिक क्लस्टर
औद्योगिक कॉरिडोर योजना के तहत सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) विकसित किया जाएगा। इसके अवस्थापना विकास के लिए कैबिनेट ने 272.25 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है।
प्रस्तावित क्लस्टर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप विकसित किया जाएगा। ऐसे में यहां स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों को सड़क और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की उम्मीद है। परियोजना के निर्माण में होने वाला संभावित व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। इसमें केंद्र सरकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित या प्रस्तावित नहीं है।

 

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कैबिनेट की मंजूरी के बाद निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। एजेंसी का चयन होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। माना जा रहा है कि क्लस्टर के विकसित होने से सुल्तानपुर और आसपास के क्षेत्रों में विनिर्माण, भंडारण, परिवहन और इससे जुड़ी सेवाओं का विस्तार हो सकता है।

झांसी लिंक एक्सप्रेसवे पर 7,968.30 करोड़ रुपये खर्च
बुंदेलखंड के लिए भी कैबिनेट का फैसला अहम रहा। सरकार ने 7,968.30 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के विकास को मंजूरी दी है। इस परियोजना का सीधा लाभ बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी बीडा क्षेत्र और डिफेंस कॉरिडोर को मिलने की उम्मीद है।
झांसी और आसपास के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को तेज और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने से औद्योगिक निवेश के लिए माहौल मजबूत हो सकता है। एक्सप्रेसवे के जरिए प्रदेश के दूसरे हिस्सों और देश के अन्य क्षेत्रों से आवागमन सुगम होने की संभावना है।

इस परियोजना का पूरा संभावित व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से किसी वित्तीय भागीदारी की अपेक्षा या प्रस्ताव नहीं रखा गया है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

सरकार को उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे के साथ औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और बीडा तथा डिफेंस कॉरिडोर में निवेश को भी गति मिलेगी। निर्माण के साथ-साथ आगे विकसित होने वाली औद्योगिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

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गंगा एक्सप्रेसवे अब हरिद्वार तक जाएगा
उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार की दिशा में कैबिनेट ने एक और बड़ा फैसला लिया है। गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे छह लेन का होगा और भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।
इस विस्तार पर राज्य सरकार के ऊपर करीब 10,761 करोड़ रुपये का संभावित व्यय-भार आएगा। इस परियोजना में भी केंद्र सरकार की किसी वित्तीय भागीदारी की अपेक्षा या प्रस्ताव नहीं है। अब परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने समेत आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से बिजनौर की कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण सुधार होने की उम्मीद है। वर्तमान में बिजनौर से हरिद्वार के लिए प्रमुख संपर्क मार्गों में एनएच-34 शामिल है। नए एक्सप्रेसवे से दोनों क्षेत्रों के बीच तेज और नियंत्रित यातायात की सुविधा विकसित हो सकती है।

इस परियोजना का एक बड़ा पहलू धार्मिक पर्यटन से भी जुड़ा है। गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार के बाद प्रयागराज और हरिद्वार, दोनों प्रमुख कुंभ नगरियां, एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेंगी। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोनों धार्मिक नगरियों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

आठ मेगा औद्योगिक इकाइयों को निवेश प्रोत्साहन
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत आठ मेगा श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए जाने की मंजूरी भी दी है। इन परियोजनाओं में कुल 2,901.97 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
प्रोत्साहन पाने वाली परियोजनाओं में गौतमबुद्ध नगर में सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लैक्सीफिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड का 605.37 करोड़ रुपये, हमीरपुर में शाल्विस स्पेशियलिटीज लिमिटेड का 297.30 करोड़ रुपये और हाथरस में साउंड कास्टिंग्स प्राइवेट लिमिटेड का 225 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।

इसके अलावा बाराबंकी में वृन्दावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड 436.12 करोड़ रुपये, लखीमपुर खीरी में जुआरी एनविएन बायोएनर्जी प्राइवेट लिमिटेड 294.72 करोड़ रुपये, हाथरस में पसवारा पेपर्स लिमिटेड 315 करोड़ रुपये, मथुरा में सीआरडी फूड्स एंड बेवरेजेज लिमिटेड 363.94 करोड़ रुपये और उन्नाव में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज लिमिटेड 363.52 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

इन इकाइयों को नीति के तहत पात्रता के अनुसार नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इससे बड़े निवेशकों को उत्तर प्रदेश में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

पूर्वांचल से बुंदेलखंड तक निवेश का नेटवर्क
कैबिनेट के इन फैसलों को एक साथ देखें तो सरकार का फोकस उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क और औद्योगिक ढांचे को एक-दूसरे से जोड़ने पर दिखाई देता है। सुल्तानपुर में लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, झांसी में एक्सप्रेसवे और डिफेंस कॉरिडोर की कनेक्टिविटी तथा गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को बेहतर परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा असर माल ढुलाई, उद्योगों की स्थापना और बाजारों तक पहुंच पर पड़ सकता है। वहीं, आठ मेगा परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिलने से कई जिलों में निवेश और रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के निर्माण और इनके बाद विकसित होने वाली आर्थिक गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सुल्तानपुर, बुंदेलखंड, बिजनौर और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े क्षेत्रों के साथ-साथ निवेश पाने वाले जिलों में भी आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, योगी कैबिनेट के इन फैसलों में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक क्लस्टर, निवेश प्रोत्साहन और रोजगार को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति नजर आती है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं का वास्तविक प्रभाव निर्माण की गति, निवेश के धरातल पर उतरने और प्रस्तावित औद्योगिक इकाइयों के संचालन पर निर्भर करेगा।

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