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CM योगी का बड़ा एक्शन! एक फ्लैट कई लोगों को बेचने की जांच, बिल्डर पर शिकंजा लखनऊ। उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी एक गंभीर शिकायत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचे कई पीड़ितों ने आरोप लगाया कि नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ में सक्रिय एक बिल्डर ने कथित रूप से एक ही फ्लैट की रजिस्ट्री कई अलग-अलग लोगों के नाम कर […]

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  • July 13, 2026 11:59 pm IST, Published 4 hours ago

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी एक गंभीर शिकायत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचे कई पीड़ितों ने आरोप लगाया कि नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ में सक्रिय एक बिल्डर ने कथित रूप से एक ही फ्लैट की रजिस्ट्री कई अलग-अलग लोगों के नाम कर दी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट कहा है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी बिल्डर के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाएगा।

सोमवार को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। इस दौरान भूमि विवाद, अवैध कब्जे, अपराध, धमकी, सरकारी योजनाओं और रियल एस्टेट से जुड़े कई मामलों की शिकायतें मुख्यमंत्री के सामने रखी गईं। इनमें सबसे गंभीर मामला एक बिल्डर द्वारा कथित रूप से एक ही फ्लैट को कई खरीदारों के नाम बेचने का सामने आया।

शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर फ्लैट खरीदे थे, लेकिन बाद में पता चला कि उसी फ्लैट की रजिस्ट्री अन्य लोगों के नाम भी की जा चुकी है। इससे खरीदारों के सामने आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कानूनी संकट भी खड़ा हो गया है। कई परिवार वर्षों से अपने घर के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अब उन्हें न्याय की उम्मीद मुख्यमंत्री से है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरे मामले की पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित बिल्डर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्दोष खरीदारों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि जांच के दौरान सभी दस्तावेजों, रजिस्ट्री रिकॉर्ड, परियोजना की स्वीकृतियों और संबंधित विभागों के अभिलेखों की बारीकी से जांच की जाए। यदि किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में इस तरह के मामलों से निवेशकों और आम खरीदारों का भरोसा कमजोर होता है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, डिजिटल रिकॉर्ड और समय-समय पर निगरानी बेहद जरूरी है। राज्य सरकार द्वारा इस मामले में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जाने को खरीदारों के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जनता दर्शन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अन्य शिकायतों पर भी अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लैट खरीदने से पहले खरीदारों को परियोजना की वैधता, रेरा पंजीकरण, भूमि स्वामित्व, निर्माण स्वीकृति और रजिस्ट्री से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच अवश्य करनी चाहिए। इससे भविष्य में धोखाधड़ी की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है।

सरकार की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि प्रदेश में निवेश और आवासीय परियोजनाओं का माहौल पारदर्शी और भरोसेमंद बने। ऐसे मामलों में त्वरित जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई से न केवल पीड़ितों को राहत मिलेगी बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

फिलहाल संबंधित विभागों ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो बिल्डर पर कानूनी कार्रवाई के साथ पीड़ित खरीदारों को राहत दिलाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

सरकार का कहना है कि किसी भी नागरिक के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पीड़ित खरीदारों को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी।

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