कानपुर: साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने करीब 5600 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए गिरोह के दो कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शाहजेब वारिस और सलमान के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से 65.26 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क से जुड़े लेनदेन के लिए कानपुर के अलग-अलग बैंकों में 72 खातों का इस्तेमाल किया गया। इन खातों के माध्यम से करीब 5600 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इन खातों में हुई रकम की आवाजाही और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह निवेश के नाम पर लोगों से रकम जुटाकर उसे गेमिंग प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों के जरिए आगे बढ़ाता था। पुलिस को आशंका है कि रकम को सीधे एक जगह रखने के बजाय शेल कंपनियों और अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से घुमाया जाता था। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल लेनदेन की वास्तविक प्रकृति और रकम के स्रोत को छिपाने के लिए किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP पर इन बैंक खातों से जुड़ी 86 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी पुलिस को मिली है। शिकायतों का संबंध देश के अलग-अलग हिस्सों से बताया जा रहा है। जांच में दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और बिहार समेत कई राज्यों में इस नेटवर्क की गतिविधियों के संकेत मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क केवल कानपुर तक सीमित नहीं था। इसके तार देश के विभिन्न राज्यों में फैले होने की आशंका है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसियों के रडार पर गिरोह से जुड़े सात से आठ अन्य संदिग्ध भी बताए जा रहे हैं।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि 5600 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन में रकम किन स्रोतों से आई और उसे किन खातों या कंपनियों के माध्यम से आगे भेजा गया। पुलिस बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल लेनदेन, मोबाइल फोन और बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसके जरिए नेटवर्क के संचालन, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और कथित साइबर ठगी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों और वित्तीय लेनदेन की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल पुलिस का ध्यान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ उन 72 बैंक खातों की पड़ताल पर है, जिनमें बड़े पैमाने पर संदिग्ध रकम का लेनदेन हुआ। साथ ही NCRP पर दर्ज शिकायतों को भी जांच से जोड़ा जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और कथित ठगी से हासिल रकम को किस तरह अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित किया गया। मामले की जांच जारी है।