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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर हाईकोर्ट सख्त, भ्रष्टाचारियों के लिए मौत की सजा पर विचार की सलाह

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणियां की हैं। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े स्थान पर इस तरह की घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज की नैतिक […]

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  • July 22, 2026 10:58 am IST, Published 1 hour ago

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणियां की हैं। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े स्थान पर इस तरह की घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज की नैतिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज ऐसे मामलों से विचलित नहीं होता, तो यह चिंता का विषय है।

अपने 51 पन्नों के फैसले में न्यायमूर्ति श्रीधरन ने भ्रष्टाचार के बढ़ते दायरे पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में भ्रष्टाचार को कई लोग सामान्य मानने लगे हैं और अक्सर तब तक उसे गलत नहीं समझते, जब तक पकड़े न जाएं। उन्होंने कहा कि संस्थानों में फैला व्यवस्थित भ्रष्टाचार प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर कर रहा है और इससे आम नागरिकों का विश्वास भी प्रभावित होता है।

इसी संदर्भ में न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि सरकार भ्रष्टाचार निरोधक कानून, 1988 में संशोधन कर गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में और अधिक कठोर दंड के प्रावधान पर विचार कर सकती है। उन्होंने यह व्यक्तिगत न्यायिक टिप्पणी के रूप में कही, न कि किसी बाध्यकारी आदेश के रूप में। उन्होंने कहा कि समाज में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी संदेश देने के लिए कठोर कानूनी उपायों पर व्यापक बहस की आवश्यकता है।

फैसले में न्यायमूर्ति श्रीधरन ने तथाकथित ‘बुलडोजर न्याय’ पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी अपराध के तुरंत बाद संपत्ति ध्वस्त करना न्यायिक प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता। उनके अनुसार, यदि कोई अवैध निर्माण हुआ है तो यह प्रशासन की निगरानी में हुई चूक का भी परिणाम है। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि अवैध निर्माण समय रहते रोके जाएं, न कि वर्षों बाद कार्रवाई कर केवल अंतिम उपभोक्ता या मकान मालिक को दंडित किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में भ्रष्ट अधिकारी और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से अवैध निर्माण पनपते हैं, जबकि बाद में कार्रवाई का सबसे बड़ा बोझ आम नागरिकों पर पड़ता है। अदालत की इन टिप्पणियों ने भ्रष्टाचार, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के शासन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, मृत्युदंड संबंधी टिप्पणी न्यायालय का सुझाव है, कोई कानूनी निर्देश नहीं।

 

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