NIOS में हिंदी का बढ़ा क्रेज, 38% छात्र दिल्ली-नोएडा से

नई दिल्ली/नोएडा: राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) में हिंदी विषय को लेकर विद्यार्थियों की रुचि लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच देशभर के 22 क्षेत्रीय केंद्रों से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कुल 10,42,943 विद्यार्थियों ने हिंदी विषय का चयन किया। इनमें अकेले दिल्ली-नोएडा क्षेत्र […]

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  • September 11, 2026 2:07 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली/नोएडा: राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) में हिंदी विषय को लेकर विद्यार्थियों की रुचि लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच देशभर के 22 क्षेत्रीय केंद्रों से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कुल 10,42,943 विद्यार्थियों ने हिंदी विषय का चयन किया। इनमें अकेले दिल्ली-नोएडा क्षेत्र के विद्यार्थियों की संख्या 3,94,131 रही। यानी हिंदी विषय चुनने वाले विद्यार्थियों में लगभग 38 प्रतिशत हिस्सेदारी दिल्ली-नोएडा क्षेत्र की रही।

यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हिंदी को लेकर बढ़ती रुचि को अब केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं माना जा सकता। NIOS के विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों में हिंदी विषय चुनने वाले विद्यार्थियों की संख्या बताती है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र हिंदी को पढ़ाई के एक उपयोगी और सहज विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

दिल्ली-नोएडा सबसे आगे, जयपुर दूसरे स्थान पर

वर्ष 2021 से 2025 के दौरान हिंदी विषय चुनने वाले विद्यार्थियों के मामले में दिल्ली-नोएडा क्षेत्र सबसे आगे रहा। यहां कुल 3,94,131 विद्यार्थियों ने हिंदी विषय लिया। इसके बाद जयपुर क्षेत्र में 1,85,545 विद्यार्थियों ने हिंदी का चयन किया। प्रयागराज क्षेत्र में यह संख्या 45,970 रही।

आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिल्ली-नोएडा क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों के बीच हिंदी विषय चुनने वाले विद्यार्थियों की संख्या में काफी अंतर है। इसके बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदी की मौजूदगी उल्लेखनीय है। चंडीगढ़, देहरादून, भोपाल, गुवाहाटी, रांची, कोलकाता और पटना जैसे क्षेत्रीय केंद्रों में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिंदी को प्राथमिकता दी।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक चंडीगढ़ में 1,03,354, देहरादून में 98,511, भोपाल में 32,937, गुवाहाटी में 32,460, रांची में 30,239, कोलकाता में 23,681 और पटना में 24,301 विद्यार्थियों ने हिंदी विषय चुना।

हिंदी की पसंद सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं

हिंदी को लेकर आम धारणा अक्सर उत्तर भारत के राज्यों से जोड़कर देखी जाती है, लेकिन NIOS के आंकड़े इससे कहीं व्यापक तस्वीर पेश करते हैं। उपलब्ध क्षेत्रीय आंकड़ों में कोच्चि, पुणे, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, गंगटोक, जम्मू, रायपुर, चेन्नई और हैदराबाद जैसे केंद्र भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भी विद्यार्थियों ने हिंदी विषय को चुना है।

कोच्चि में 12,689, पुणे में 12,864, बेंगलुरु में 4,361, भुवनेश्वर में 4,057, गंगटोक में 4,086, जम्मू में 3,316, रायपुर में 3,180, चेन्नई में 2,274 और हैदराबाद में 2,807 विद्यार्थियों के हिंदी विषय चुनने का उल्लेख आंकड़ों में किया गया है।

इससे यह संकेत मिलता है कि हिंदी सीखने की जरूरत और रुचि का दायरा भाषाई सीमाओं से आगे बढ़ रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थी हिंदी को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और संचार से जुड़े अवसरों के संदर्भ में उपयोगी मान सकते हैं।

हिंदी को सरल और स्वाभाविक विकल्प मान रहे छात्र

हिंदी विषय की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई कारण हो सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए अपनी परिचित भाषा में अध्ययन करना अपेक्षाकृत सहज होता है। विशेषकर मुक्त विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में पढ़ने वाले ऐसे विद्यार्थी, जो अलग-अलग उम्र और शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आते हैं, अपने लिए समझने में आसान विषय और माध्यम को प्राथमिकता दे सकते हैं।

NIOS की व्यवस्था पारंपरिक स्कूलिंग से अलग है। यहां ऐसे विद्यार्थियों को भी शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलता है, जो किसी कारण से नियमित विद्यालयी व्यवस्था में पढ़ाई नहीं कर पाए। इसलिए विषय का चुनाव करते समय भाषा की सहजता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इसके अलावा हिंदी का उपयोग शिक्षा के साथ-साथ सरकारी सेवाओं, मीडिया, पत्रकारिता, अनुवाद, डिजिटल कंटेंट, ग्राहक सेवा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी दिखाई देता है। ऐसे में विद्यार्थी हिंदी को केवल एक विषय के रूप में नहीं बल्कि भविष्य में काम आने वाले कौशल के तौर पर भी देख सकते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार ने बढ़ाई उपयोगिता

आज रोजगार के क्षेत्र में भाषा कौशल की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। सरकारी सेवाओं से लेकर निजी क्षेत्र तक ऐसे कई काम हैं, जहां हिंदी में प्रभावी संवाद करने की क्षमता उपयोगी साबित हो सकती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने भी हिंदी के उपयोग को काफी व्यापक बनाया है। समाचार वेबसाइट, सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन शिक्षा और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में हिंदी सामग्री की मांग बढ़ी है। इससे हिंदी पढ़ने और लिखने की क्षमता को नए अवसरों से जोड़कर देखा जाने लगा है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी हिंदी महत्वपूर्ण हो सकती है। प्रश्नों को समझने, उत्तर लिखने और सामान्य अध्ययन से जुड़े विषयों को पढ़ने में भाषा की मजबूत पकड़ मददगार होती है। यही वजह है कि हिंदी विषय का चयन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी को केवल साहित्यिक रुचि के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा।

NIOS में भाषा के जरिए शिक्षा को ज्यादा समावेशी बनाने पर जोर

समाचार में दिए गए वक्तव्य के अनुसार, NIOS हिंदी समेत भारतीय भाषाओं के माध्यम से शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने के प्रयास कर रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक शिक्षा की पहुंच आसान बनाना है।

मुक्त विद्यालयी शिक्षा की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी लचीली प्रकृति है। विद्यार्थी अपनी परिस्थितियों के अनुसार पढ़ाई जारी रख सकते हैं। ऐसे में यदि उन्हें अपनी सुविधा के अनुरूप विषय और भाषा का विकल्प मिलता है तो शिक्षा से जुड़ाव मजबूत होने की संभावना रहती है।

हिंदी का बढ़ता चयन इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा माना जा सकता है। आंकड़े यह संकेत देते हैं कि विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक जरूरतों और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भाषा का चुनाव कर रहे हैं।

दिल्ली-नोएडा के आंकड़े क्यों हैं खास?

दिल्ली-नोएडा क्षेत्र का आंकड़ा इस पूरी तस्वीर में सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। चार साल की अवधि में यहां 3.94 लाख से अधिक विद्यार्थियों द्वारा हिंदी विषय चुना जाना बताता है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हिंदी की शैक्षणिक मांग काफी मजबूत है। कुल 10,42,943 विद्यार्थियों के मुकाबले दिल्ली-नोएडा की संख्या करीब 38 प्रतिशत बैठती है।

दिल्ली-एनसीआर देश के प्रमुख शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक केंद्रों में शामिल है। यहां अलग-अलग राज्यों और भाषाई पृष्ठभूमियों से आने वाले विद्यार्थी रहते और पढ़ते हैं। ऐसे वातावरण में हिंदी एक साझा संवाद भाषा के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यही कारण है कि यहां हिंदी विषय के प्रति विद्यार्थियों की मजबूत रुचि को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और रोजगार संबंधी परिस्थितियों से भी जोड़कर देखा जा सकता है।

आंकड़े क्या संकेत देते हैं?

NIOS के वर्ष 2021 से 2025 के आंकड़े हिंदी की बदलती भूमिका की ओर संकेत करते हैं। 10.42 लाख से अधिक विद्यार्थियों का हिंदी विषय चुनना बताता है कि हिंदी की मांग केवल पारंपरिक हिंदी भाषी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।

हालांकि इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सभी विद्यार्थी केवल रोजगार के कारण हिंदी चुन रहे हैं। विषय चयन के पीछे व्यक्तिगत रुचि, शैक्षणिक सुविधा, पारिवारिक वातावरण, भविष्य की योजना और भाषा की समझ जैसे कई कारण हो सकते हैं।

फिर भी एक बात स्पष्ट है कि हिंदी आज शिक्षा और रोजगार दोनों के संदर्भ में उपयोगी भाषा के रूप में अपनी जगह मजबूत कर रही है। दिल्ली-नोएडा का 38 प्रतिशत हिस्सा इस बदलाव को और अधिक चर्चा में ला रहा है।

आगे क्या बदल सकता है?

डिजिटल शिक्षा के विस्तार के साथ भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री की मांग और बढ़ सकती है। यदि विद्यार्थियों को हिंदी में बेहतर अध्ययन सामग्री, डिजिटल पाठ्यक्रम, परीक्षा संबंधी संसाधन और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध होते हैं, तो हिंदी माध्यम से शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों के लिए अवसरों का दायरा और विस्तृत हो सकता है।

NIOS जैसे संस्थानों के लिए भी यह आंकड़ा भविष्य की शैक्षणिक रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। अलग-अलग क्षेत्रीय केंद्रों में विद्यार्थियों की भाषा संबंधी पसंद को समझकर पाठ्य सामग्री और डिजिटल संसाधनों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है।

NIOS के 2021 से 2025 के आंकड़ों ने हिंदी विषय को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। इस अवधि में 10,42,943 विद्यार्थियों ने हिंदी चुनी, जिनमें 3,94,131 विद्यार्थी दिल्ली-नोएडा क्षेत्र से रहे। इस तरह कुल चयन में दिल्ली-नोएडा की हिस्सेदारी करीब 38 प्रतिशत रही।

जयपुर, चंडीगढ़, देहरादून, प्रयागराज, भोपाल, गुवाहाटी और देश के अन्य क्षेत्रों में भी हिंदी का चयन बड़ी संख्या में हुआ। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के केंद्रों में भी हिंदी चुनने वाले विद्यार्थियों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि हिंदी का शैक्षणिक दायरा लगातार व्यापक हो रहा है।

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