ग्रेटर नोएडा। देश के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के तीसरे चरण के विस्तार की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। परियोजना के लिए आवश्यक भूमि का लगभग 80 प्रतिशत अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। भूमि अधिग्रहण के एवज में प्रभावित किसानों को अब तक करीब 7,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। इससे एयरपोर्ट विस्तार परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर भारत का सबसे बड़ा एविएशन हब बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। पहले चरण के निर्माण के साथ-साथ भविष्य की बढ़ती हवाई यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीसरे चरण के लिए भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
किसानों को मिला रिकॉर्ड मुआवजा
जानकारी के अनुसार, तीसरे चरण के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के बदले किसानों को अब तक लगभग 7,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। प्रशासन का दावा है कि अधिकांश किसानों ने सहमति के साथ अपनी भूमि परियोजना के लिए उपलब्ध कराई है।
मुआवजा राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी गई है ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे। प्रशासन का कहना है कि शेष किसानों के साथ भी बातचीत जारी है और जल्द ही अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा
एयरपोर्ट विस्तार के लिए निर्धारित भूमि का करीब 80 फीसदी हिस्सा प्रशासन के कब्जे में आ चुका है। बची हुई भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है ताकि परियोजना निर्धारित समय सीमा के भीतर आगे बढ़ सके।
भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद रनवे, टैक्सी-वे, कार्गो टर्मिनल, रखरखाव क्षेत्र और अन्य आधुनिक सुविधाओं के निर्माण का कार्य तेज होगा।
उत्तर भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की तैयारी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भविष्य में एशिया के प्रमुख एयरपोर्ट्स में शामिल करने की योजना है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां लाखों यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर के एयर ट्रैफिक पर दबाव कम होगा और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
रोजगार के खुलेंगे नए अवसर
एयरपोर्ट निर्माण और उसके संचालन से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। वहीं एयरपोर्ट शुरू होने के बाद एयरलाइंस, ग्राउंड स्टाफ, सुरक्षा, होटल, लॉजिस्टिक्स, कार्गो और परिवहन सहित कई क्षेत्रों में लाखों रोजगार सृजित होने की संभावना है।
औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
जेवर एयरपोर्ट के आसपास तेजी से औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश की योजना बना रही हैं। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, होटल, आईटी पार्क और औद्योगिक इकाइयों के विकास की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एयरपोर्ट बनने से गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।
बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी बड़ी ताकत
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, मेट्रो और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इससे दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के यात्रियों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
एयरपोर्ट के आसपास रियल एस्टेट, व्यापार, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में तेजी आने की उम्मीद है। होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउसिंग और अन्य व्यवसायों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
प्रशासन का दावा
प्रशासन का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है। प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने के साथ उनकी समस्याओं के समाधान पर भी लगातार काम किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार शेष भूमि का अधिग्रहण भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा, जिससे एयरपोर्ट विस्तार परियोजना समय पर आगे बढ़ सकेगी।
देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक विकास का नया केंद्र बनने जा रहा है। इससे निर्यात, आयात, पर्यटन, निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। एयर कार्गो सेवाओं के विस्तार से व्यापारिक गतिविधियां भी तेज होंगी और भारत की वैश्विक कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
परियोजना के तीसरे चरण के लिए 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण और किसानों को 7,000 करोड़ रुपये के भुगतान को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। आने वाले समय में इसके पूरा होने से उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के एविएशन और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।