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बिजली चोरी रोकने में नाकामी पर इंजीनियरों को नोटिस, संपत्ति जांच की तैयारी

लखनऊः उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश के कुछ इलाकों में बिजली चोरी का स्तर 77 फीसदी तक पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने ऐसे क्षेत्रों को गंभीरता से लिया है। बिजली चोरी के कारण होने वाले राजस्व […]

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  • August 30, 2026 1:43 pm IST, Published 38 minutes ago

लखनऊः उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश के कुछ इलाकों में बिजली चोरी का स्तर 77 फीसदी तक पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने ऐसे क्षेत्रों को गंभीरता से लिया है। बिजली चोरी के कारण होने वाले राजस्व नुकसान को कम करने के लिए प्रदेश के सर्वाधिक बिजली चोरी वाले 50 फीडरों को चिन्हित किया गया है। इन फीडरों पर तैनात जिम्मेदार इंजीनियरों से जवाब मांगा गया है और उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके क्षेत्र में बिजली चोरी रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
यूपीपीसीएल की ओर से कई इंजीनियरों को नोटिस दिए जाने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही उन क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने की तैयारी है, जहां बिजली चोरी लगातार अधिक बनी हुई है। विभाग का मानना है कि सिर्फ बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं पर कार्रवाई से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं होगा, बल्कि उन इलाकों में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा जरूरी है।

बिजली चोरी के मामलों में लापरवाही या किसी तरह की संदिग्ध भूमिका सामने आने पर संबंधित इंजीनियरों की संपत्ति की जांच भी कराई जा सकती है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कहीं किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका बिजली चोरी से जुड़े मामलों में अनुचित तरीके से तो नहीं रही। हालांकि संपत्ति की जांच अथवा किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही की जाएगी।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक बिजली चोरी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच प्रदेश में ऐसे मामलों में करीब 18 फीसदी की कमी आने की बात कही गई है। इसके बावजूद कई फीडरों पर चोरी का स्तर बेहद अधिक है। गाजीपुर और वाराणसी के कुछ फीडरों पर बिजली चोरी की स्थिति सबसे ज्यादा बताई जा रही है। इसके अलावा प्रतापगढ़, गड़वारा और भटनी जैसे फीडर भी अधिक बिजली चोरी वाले क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं।

इन फीडरों पर तैनात इंजीनियरों से जवाब मांगा गया है। उनसे क्षेत्र में बिजली चोरी की स्थिति, किए गए निरीक्षण, पकड़े गए मामलों और चोरी रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा गया है। विभाग अब मिले जवाबों के आधार पर यह समीक्षा करेगा कि संबंधित क्षेत्रों में बिजली चोरी रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई हुई या नहीं।

अधिक बिजली चोरी वाले फीडरों की पहचान के बाद यूपीपीसीएल का फोकस अब निगरानी और जवाबदेही दोनों पर है। विभाग की कोशिश है कि जिन क्षेत्रों में बिजली चोरी का आंकड़ा लगातार अधिक बना हुआ है, वहां अभियान को और प्रभावी बनाया जाए। बिजली चोरी पर नियंत्रण से बिजली कंपनियों के राजस्व में सुधार होने के साथ वितरण व्यवस्था को भी बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

बिजली चोरी का सीधा असर बिजली व्यवस्था और विभाग की आय पर पड़ता है। ऐसे में यूपीपीसीएल की ओर से चिन्हित किए गए 50 फीडरों पर आने वाले दिनों में कार्रवाई और निगरानी बढ़ने की संभावना है। इंजीनियरों से मांगे गए जवाब और प्रस्तावित जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि विभाग जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ किस स्तर तक कार्रवाई करता है।

 

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