लखनऊ/नई दिल्ली। फैटी लिवर को अक्सर लोग एक सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन एक नए अध्ययन ने इससे जुड़ी नींद की गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचा है। शोध में फैटी लिवर से पीड़ित मरीजों में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) की समस्या काफी आम पाई गई। इसका मतलब है कि सोते समय कुछ लोगों की सांस बार-बार रुक सकती है या सांस लेने की प्रक्रिया काफी कमजोर पड़ सकती है। इसका असर रात की नींद, शरीर में ऑक्सीजन के स्तर और दिनभर की ऊर्जा पर पड़ सकता है।
102 फैटी लिवर मरीजों पर किया गया अध्ययन
रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स जम्मू और एम्स नई दिल्ली से जुड़े शोधकर्ताओं ने 20 से 60 वर्ष की उम्र के 102 फैटी लिवर मरीजों का अध्ययन किया। मरीजों की नींद की स्थिति को सामान्य सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि रातभर की नींद की वैज्ञानिक जांच यानी पॉलीसोम्नोग्राफी भी की गई। अध्ययन में 54 मरीजों में स्लीप एपनिया पाया गया, जो कुल प्रतिभागियों का करीब 52.94 प्रतिशत है। यानी अध्ययन में शामिल लगभग हर दो फैटी लिवर मरीजों में से एक में यह समस्या सामने आई।
यह अध्ययन 30 जुलाई 2026 को Sleep and Vigilance नामक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह एक अध्ययन के निष्कर्ष हैं और इससे हर फैटी लिवर मरीज को स्लीप एपनिया होने की बात साबित नहीं होती।
रात में बार-बार क्यों रुकती है सांस?
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में सोते समय गले के ऊपरी हिस्से की वायुमार्ग मांसपेशियां ढीली पड़ सकती हैं। इससे सांस का रास्ता कुछ समय के लिए संकरा या बंद हो जाता है। व्यक्ति कुछ सेकंड के लिए सांस लेना बंद कर सकता है और फिर शरीर की प्रतिक्रिया के कारण अचानक सांस सामान्य हो सकती है।
ऐसे एपिसोड रात में कई बार हो सकते हैं। मरीज को हर बार पूरी तरह जागने का एहसास नहीं होता, लेकिन उसकी नींद बार-बार बाधित होती रहती है। इसी वजह से सुबह उठने के बाद भी थकान, नींद पूरी न होने का एहसास और दिन में सुस्ती बनी रह सकती है।
रात में तेज खर्राटे, नींद के दौरान सांस रुकने की आवाज, अचानक हांफते हुए उठना, बार-बार करवट बदलना और सुबह सिरदर्द जैसे लक्षण भी स्लीप एपनिया की ओर संकेत कर सकते हैं।
फैटी लिवर और स्लीप एपनिया का क्या संबंध?
फैटी लिवर और स्लीप एपनिया के बीच संबंध को लेकर पहले भी वैज्ञानिक शोध हो चुके हैं। खासकर मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे कारक दोनों स्थितियों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। एक पूर्व अध्ययन में भी ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के बीच संबंध की जांच की गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या को केवल एक बीमारी से दूसरी बीमारी का सीधा कारण मानना सही नहीं होगा। दोनों के पीछे कई साझा मेटाबॉलिक और जीवनशैली से जुड़े कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए अधिक वजन, पेट के आसपास जमा चर्बी, शारीरिक गतिविधि की कमी, खराब खानपान और इंसुलिन रेजिस्टेंस फैटी लिवर के साथ-साथ स्लीप एपनिया के जोखिम को भी प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अलावा स्लीप एपनिया में रात के दौरान बार-बार ऑक्सीजन की कमी और शरीर पर पड़ने वाला तनाव मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। शोधों में OSA और फैटी लिवर के बीच संबंध पर लगातार अध्ययन किया जा रहा है।
फैटी लिवर की ग्रेड बढ़ने पर क्यों बढ़ सकती है चिंता?
अध्ययन की रिपोर्ट में फैटी लिवर की गंभीरता और स्लीप एपनिया के बीच संबंध की ओर भी संकेत किया गया है। शोधकर्ताओं ने अलग-अलग ग्रेड के फैटी लिवर मरीजों की नींद के दौरान सांस रुकने और ऑक्सीजन से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया।
इसका महत्व इसलिए है क्योंकि फैटी लिवर को हमेशा केवल अल्ट्रासाउंड में दिखाई देने वाली अतिरिक्त चर्बी समझना उचित नहीं है। कुछ मरीजों में समय के साथ लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। आज चिकित्सा जगत में मेटाबॉलिक कारणों से होने वाली फैटी लिवर बीमारी के लिए MASLD यानी Metabolic Dysfunction-Associated Steatotic Liver Disease शब्द का भी इस्तेमाल बढ़ रहा है।
इसलिए अगर किसी व्यक्ति की रिपोर्ट में फैटी लिवर आया है और साथ ही उसे तेज खर्राटे, दिन में अत्यधिक नींद या रात में सांस रुकने की शिकायत है, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किन लक्षणों पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर रात में बार-बार सांस रुकने की जानकारी परिवार के किसी सदस्य को मिलती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। खासतौर पर निम्न लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए—
सोते समय तेज और लगातार खर्राटे आना
कुछ सेकंड के लिए सांस रुकना
अचानक हांफते हुए या घुटन के साथ जागना
सुबह उठने पर सिरदर्द या भारीपन
दिन में बार-बार नींद आना
पर्याप्त समय सोने के बाद भी थकान रहना
ध्यान लगाने और काम करने में परेशानी होना
OSA की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार स्लीप स्टडी या पॉलीसोम्नोग्राफी की सलाह दे सकते हैं। इसमें सोते समय सांस, ऑक्सीजन, हृदय गति और नींद से जुड़े कई संकेतों की निगरानी की जाती है।
फैटी लिवर को लेकर क्या सावधानी जरूरी है?
फैटी लिवर पाए जाने पर सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपनी जीवनशैली और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर ध्यान दे। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश और डॉक्टर द्वारा बताई गई जांच एवं उपचार का पालन महत्वपूर्ण है।
सिर्फ इसलिए कि फैटी लिवर में शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिख रहा, इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। इसी तरह खर्राटों को भी हमेशा सामान्य समस्या समझना उचित नहीं है, खासकर जब उनके साथ सांस रुकने या दिन में अत्यधिक नींद आने की शिकायत हो।
निष्कर्ष
नई रिसर्च ने फैटी लिवर और नींद के दौरान सांस रुकने वाली बीमारी के बीच संभावित मजबूत संबंध को फिर सामने रखा है। 102 मरीजों के अध्ययन में करीब आधे मरीजों में स्लीप एपनिया पाया जाना निश्चित रूप से ध्यान देने वाली बात है।
हालांकि, इस निष्कर्ष को हर फैटी लिवर मरीज पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। फिर भी यदि फैटी लिवर के साथ तेज खर्राटे, रात में सांस रुकना, घुटन के साथ जागना या दिन में अत्यधिक नींद जैसे लक्षण हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना समझदारी होगी। समय पर पहचान और उचित उपचार से स्लीप एपनिया तथा उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। इसे व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह न मानें। किसी भी लक्षण या बीमारी की स्थिति में योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।