देहरादून: रोजगार और युवाओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा के राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने केंद्र की रोजगार पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर देने के साथ ही उन्हें बदलती अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी काम कर रही है।
बंसल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए उनके रोजगार संबंधी बयानों को निशाने पर लिया। उन्होंने राहुल गांधी की मुहिम को ‘झूठ की गूंज’ करार दिया। बंसल ने सरकार की रोजगार नीति के समर्थन में 20वें राष्ट्रीय रोजगार मेले का उल्लेख किया। 19 सितंबर को आयोजित इस चरण में देशभर के 45 केंद्रों पर 51 हजार से अधिक नवनियुक्त युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस आयोजन के साथ अक्टूबर 2022 में शुरू हुए रोजगार मेले के 20 संस्करणों में नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं की संख्या करीब 12.75 लाख हो गई है।
नरेश बंसल ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ उन्हें नई तकनीक और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना भी जरूरी है। सरकार रोजगार मेले के अलावा कौशल विकास, प्रशिक्षण और उद्यमिता से जुड़े कार्यक्रमों को भी रोजगार नीति का हिस्सा बता रही है।
सरकार के अनुसार, रोजगार मेला अक्टूबर 2022 में 10 लाख सरकारी नियुक्तियों के शुरुआती लक्ष्य के साथ शुरू किया गया था। बंसल ने औपचारिक रोजगार को लेकर EPFO के आंकड़ों का भी हवाला दिया। सरकार ऐसे आंकड़ों को संगठित और औपचारिक रोजगार में विस्तार के संकेत के तौर पर पेश करती रही है। हालांकि EPFO में नए सदस्यों की संख्या को अकेले पूरे रोजगार बाजार का पैमाना नहीं माना जा सकता। रोजगार की स्थिति को समझने के लिए बेरोजगारी दर, श्रम भागीदारी, स्वरोजगार और अन्य रोजगार संकेतकों को भी साथ में देखना जरूरी होता है। अप्रैल 2020 से 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के 3.45 करोड़ से अधिक युवाओं का EPFO में जुड़ना दर्ज किया गया है। सरकार इन आंकड़ों को औपचारिक रोजगार में बढ़ोतरी के संकेत के रूप में पेश करती रही है।
रोजगार का मुद्दा केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। सरकार सरकारी नियुक्तियों, कौशल विकास और औपचारिक रोजगार से जुड़े आंकड़ों को अपनी नीतियों के परिणाम के रूप में सामने रखती है। दूसरी ओर, विपक्ष भर्ती परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं के लिए पर्याप्त अवसरों को लेकर सवाल उठाता रहा है।
इसी राजनीतिक बहस के बीच नरेश बंसल ने केंद्र की रोजगार पहलों को सरकार की नीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि युवाओं को केवल नौकरी देने के बजाय उन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना भी जरूरी है। वहीं राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ मुहिम शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला रही है।