अभिषेक बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि घटना के समय कोलकाता पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन इसके बावजूद कथित हमले को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने इस पूरे मामले को अपनी सुरक्षा से जुड़ा गंभीर खतरा बताया है। टीएमसी नेता ने यह भी दावा किया कि पिछले छह महीनों के दौरान उन पर जानलेवा हमले की कोशिश की यह सातवीं घटना है।
उन्होंने पुलिस के साथ-साथ न्यायपालिका की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अभिषेक का आरोप है कि बार-बार धमकियां मिलने और कथित हमलों की घटनाओं के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग की है। अभिषेक बनर्जी ने कथित निगरानी की घटना को संभावित साजिश से जोड़ते हुए कई संस्थाओं से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष, कोलकाता पुलिस, केंद्रीय गृह मंत्रालय और पश्चिम बंगाल पुलिस से मांग की है कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि उनके कार्यालय और आवास की निगरानी किसके निर्देश पर की जा रही थी।
दूसरी ओर, बीजेपी ने अभिषेक बनर्जी के आरोपों को खारिज करते हुए इसे जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। पश्चिम बंगाल के बीजेपी नेता दिलीप घोष ने टीएमसी सांसद के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर अभिषेक बनर्जी को नुकसान पहुंचाने में किसकी दिलचस्पी हो सकती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी बड़े राजनीतिक नेता का जन्मदिन फुटपाथ पर मनाते हुए देखा है। उनके मुताबिक, यदि किसी आयोजन के दौरान हंगामा होता है तो उसकी प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है। दिलीप घोष ने यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी के पास अब जनता के सामने उठाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह इस तरह के आरोप लगाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी नेता के इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पुलिस की जांच की होगी। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो की सत्यता, उसमें दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल बीजेपी और टीएमसी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। बंगाल में पहले से जारी राजनीतिक खींचतान के बीच अभिषेक बनर्जी के इन आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ टीएमसी इसे अपने नेता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मुद्दा बना रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे राजनीतिक प्रचार करार दे रही है। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और जांच के बाद किन तथ्यों का खुलासा होता है।