प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही सयानी घोष अपने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं, वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनके फैसले का विरोध करते हुए नारे लगाए। बढ़ते विरोध के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उन्हें कार्यक्रम स्थल से वाहन के जरिए रवाना किया गया।
राजनीतिक दल बदलने के बाद नेताओं को जनता और कार्यकर्ताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में कहीं समर्थन देखने को मिलता है तो कहीं विरोध भी सामने आता है। सयानी घोष के मामले में भी स्थानीय स्तर पर असंतोष और समर्थन, दोनों तरह की प्रतिक्रियाओं की चर्चा हो रही है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी तक सयानी घोष की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं संबंधित प्रशासन और पुलिस की ओर से भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है।
चुनावी माहौल में दल बदल का असर अक्सर स्थानीय राजनीति और मतदाताओं की भावनाओं पर दिखाई देता है। ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि जनता नेताओं के राजनीतिक फैसलों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रही है। हालांकि, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर होना आवश्यक माना जाता है।