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रूस में लैब कर्मचारी की मौत से प्लेग का डर, WHO ने मांगी जानकारी

मॉस्को/इर्कुत्स्क। रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय महिला लैब कर्मचारी की मौत के बाद संभावित प्लेग संक्रमण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। महिला की मौत 2 अक्टूबर 2026 को गंभीर निमोनिया के बाद हुई थी। हालांकि, रूस के स्वास्थ्य अधिकारियों ने अब तक यह पुष्टि […]

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  • October 8, 2026 7:58 pm IST, Published 1 hour ago

मॉस्को/इर्कुत्स्क। रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय महिला लैब कर्मचारी की मौत के बाद संभावित प्लेग संक्रमण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। महिला की मौत 2 अक्टूबर 2026 को गंभीर निमोनिया के बाद हुई थी। हालांकि, रूस के स्वास्थ्य अधिकारियों ने अब तक यह पुष्टि नहीं की है कि मौत का कारण प्लेग था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मामले को लेकर रूस से अतिरिक्त जानकारी मांगी है।

मृतक महिला की पहचान रूसी मीडिया में दार्या शिपिलोवा के रूप में हुई है। वह साइबेरिया के इर्कुत्स्क स्थित Anti-Plague Research Institute of Siberia and the Far East में काम करती थीं। यह संस्थान प्लेग समेत कई संक्रामक रोगों पर शोध करता है। उनकी अचानक मौत इसलिए भी चर्चा में आ गई क्योंकि वह ऐसे संस्थान में कार्यरत थीं, जहां खतरनाक रोगजनकों से संबंधित वैज्ञानिक काम होता है।

टेस्ट ट्यूब टूटने की चर्चा, लेकिन पुष्टि नहीं

महिला की बीमारी को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग दावे सामने आए। इनमें एक दावा यह भी था कि प्रयोगशाला में काम के दौरान प्लेग बैक्टीरिया वाले टेस्ट ट्यूब के टूटने से वह संक्रमित हुई हो सकती हैं। हालांकि, यह दावा अभी तक आधिकारिक जांच से साबित नहीं हुआ है।

रूस की स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी Rospotrebnadzor ने कहा है कि मृतक महिला की बीमारी को उसके प्रयोगशाला कार्य से जोड़ने वाला कोई पुष्ट प्रमाण नहीं मिला है। एजेंसी के अनुसार, जांच में ऐसे सूक्ष्मजीव नहीं मिले जो उनकी पेशेवर गतिविधियों से संबंधित संक्रमण की पुष्टि करते हों।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि महिला की मौत प्लेग संक्रमण के कारण हुई। अधिकारियों के अनुसार उनकी मौत अज्ञात कारण वाले निमोनिया से हुई। WHO भी अभी तक यह निर्धारित नहीं कर पाया है कि बीमारी पैदा करने वाला वास्तविक रोगजनक क्या था।

करीब 200 लोगों की निगरानी से बढ़ी चिंता

मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला के संपर्क में आए लोगों की पहचान की गई और करीब 200 लोगों को चिकित्सा निगरानी में रखा गया। अधिकारियों ने संपर्क में आए लोगों की जांच शुरू की ताकि संभावित संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।

बाद की जांच में अब तक संपर्क में आए लोगों में प्लेग का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। रूस के अधिकारियों ने यह भी कहा है कि बड़े पैमाने पर परीक्षण किए गए हैं और किसी खतरनाक रोगजनक के प्रसार का प्रमाण नहीं मिला।

रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती स्तर पर लगभग 200 लोगों को निगरानी में रखा गया था। यह कदम मुख्य रूप से एहतियात के तौर पर उठाया गया, क्योंकि यदि बीमारी वास्तव में न्यूमोनिक प्लेग से संबंधित होती तो शुरुआती पहचान और संपर्कों की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती थी।

WHO ने रूस से मांगा पूरा विवरण

घटना के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने के बाद WHO ने रूस से मामले की विस्तृत जानकारी मांगी है। संगठन जानना चाहता है कि महिला की गंभीर बीमारी का वास्तविक कारण क्या था और स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा इतने बड़े स्तर पर निगरानी तथा अन्य सावधानियां किस संभावित संक्रमण को ध्यान में रखकर की गईं।

WHO के अनुसार, फिलहाल उसे बीमारी के कारक रोगजनक के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। संगठन ने रूस से और अधिक तथ्य साझा करने का आग्रह किया है।

WHO की चिंता का मतलब यह नहीं है कि रूस में प्लेग का प्रकोप घोषित हो गया है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी तक ऐसा कोई पुष्ट प्रमाण नहीं है। इसी कारण इस घटना को संभावित स्वास्थ्य जोखिम की जांच के रूप में देखना अधिक उचित है, न कि किसी नए प्लेग प्रकोप की पुष्टि के रूप में।

रूस ने महामारी के खतरे से किया इनकार

रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने लगातार कहा है कि देश में इस घटना से जुड़ा कोई महामारी संबंधी खतरा सामने नहीं आया है। अधिकारियों के मुताबिक, मृतक महिला के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच की गई और अब तक प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।

8 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने उस व्यक्ति के बारे में सोशल मीडिया पर चल रही दूसरी संदिग्ध संक्रमण की खबरों को भी खारिज किया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि ऐसे दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

इससे साफ है कि एक तरफ सोशल मीडिया पर संभावित प्लेग संक्रमण को लेकर तरह-तरह की बातें चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर आधिकारिक जांच अभी तक प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं कर पाई है।

न्यूमोनिक प्लेग कितना गंभीर होता है?

प्लेग Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। इसका एक गंभीर रूप न्यूमोनिक प्लेग है, जिसमें संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर यह गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

हालांकि, किसी व्यक्ति की निमोनिया से मौत होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसे प्लेग था। निमोनिया के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। यही वजह है कि रूस में हुई इस घटना में प्रयोगशाला जांच और आधिकारिक पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण है।

अफवाहों के बीच आधिकारिक जानकारी पर जोर

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि संक्रामक रोगों से जुड़े मामलों में पारदर्शी और समय पर सूचना देना कितना जरूरी है। सोशल मीडिया पर टेस्ट ट्यूब टूटने, प्लेग संक्रमण और दूसरे मरीज के संक्रमित होने जैसे कई दावे सामने आए हैं, लेकिन इनमें से कई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में विशेषज्ञों और स्वास्थ्य संगठनों की सलाह यही है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक अपुष्ट दावों को तथ्य मानकर साझा करने से बचना चाहिए।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि 28 वर्षीय लैब कर्मचारी की मौत गंभीर निमोनिया के बाद हुई है, लेकिन प्लेग से मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। WHO इस मामले में रूस से और जानकारी मांग रहा है और संपर्क में आए लोगों की निगरानी तथा जांच जारी है।

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