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महाराष्ट्र: स्कूलों के 500 मीटर दायरे में नहीं बिकेगा स्टिंग

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में ‘स्टिंग’ (Sting) एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य स्कूली छात्रों […]

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  • July 3, 2026 7:30 pm IST, Published 2 hours ago

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में ‘स्टिंग’ (Sting) एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य स्कूली छात्रों में एनर्जी ड्रिंक की बढ़ती खपत को नियंत्रित करना और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) से जुड़े मामलों के मंत्री नरहरी झिरवाल ने विधानसभा में इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार जल्द ही इस निर्णय को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी। इसके साथ ही संबंधित विभागों को नियमों के पालन की निगरानी के निर्देश भी दिए जाएंगे।

बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता

सरकार का मानना है कि हाल के वर्षों में स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों के बीच एनर्जी ड्रिंक का चलन तेजी से बढ़ा है। कई छात्र पढ़ाई, खेलकूद या जागने के उद्देश्य से ऐसे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि अधिक मात्रा में कैफीन और शुगर युक्त एनर्जी ड्रिंक बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने स्कूल परिसरों के आसपास इनकी बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों की आसान पहुंच सीमित होगी और वे ऐसे उत्पादों का कम सेवन करेंगे।

विधानसभा में दी गई जानकारी

विधानसभा में चर्चा के दौरान मंत्री नरहरी झिरवाल ने बताया कि स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में ‘स्टिंग’ की बिक्री प्रतिबंधित की जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे ताकि इस निर्णय का प्रभावी तरीके से पालन कराया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय प्रशासन, खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा अन्य संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से निगरानी करेंगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

क्यों उठाया गया यह कदम?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन और चीनी की मात्रा अधिक होती है। नियमित या अत्यधिक सेवन से बच्चों में अनिद्रा, बेचैनी, हृदय गति बढ़ना, रक्तचाप में बदलाव, मोटापा तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र के बच्चों को ऐसे पेय पदार्थों से दूर रखना बेहतर माना जाता है। इसी वजह से कई देशों में भी एनर्जी ड्रिंक की बिक्री और विज्ञापन को लेकर विभिन्न प्रकार के नियम बनाए गए हैं।

दुकानदारों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी

सरकार के फैसले के बाद स्कूलों के आसपास स्थित किराना दुकानों, कैंटीनों और अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों को नए नियमों का पालन करना होगा। प्रशासन समय-समय पर निरीक्षण करेगा और यदि किसी दुकान में प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर ‘स्टिंग’ की बिक्री पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

अभिभावकों ने किया स्वागत

महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले का कई अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि बच्चों के खान-पान पर नियंत्रण रखना केवल परिवार की ही नहीं बल्कि समाज और सरकार की भी जिम्मेदारी है। यदि स्कूलों के आसपास एनर्जी ड्रिंक आसानी से उपलब्ध नहीं होगी तो बच्चों की आदतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि कुछ व्यापारियों का मानना है कि किसी एक ब्रांड पर प्रतिबंध लगाने के बजाय स्पष्ट और समान नीति बनाई जानी चाहिए ताकि सभी दुकानदारों के लिए नियम एक जैसे हों।

जल्द जारी होंगे दिशा-निर्देश

सरकार ने संकेत दिए हैं कि संबंधित विभाग जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा। इनमें प्रतिबंधित क्षेत्र की सीमा, निरीक्षण की प्रक्रिया, नियमों के पालन की व्यवस्था और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई का स्वरूप स्पष्ट किया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि नियम लागू होने के बाद स्थानीय अधिकारियों को विशेष निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि स्कूलों के आसपास प्रतिबंध का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस

महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों के आसपास ऐसे उत्पादों की उपलब्धता को सीमित करना है, जिनके अत्यधिक सेवन से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में जारी होने वाले दिशा-निर्देशों के बाद इस निर्णय को राज्यभर में लागू किया जाएगा और संबंधित विभाग इसकी नियमित निगरानी करेंगे।

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