कलबुर्गी (कर्नाटक): कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में पुलिस हिरासत से एक POCSO आरोपी के फरार होने की घटना ने पुलिस विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, आरोपी ने अफजलपुर पुलिस थाने की दूसरी मंजिल से छलांग लगाकर पुलिस को चकमा दिया और मौके से फरार हो गया। घटना के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया तथा आरोपी की तलाश के लिए विशेष पुलिस टीमें गठित कर दी गई हैं।
पुलिस के अनुसार फरार आरोपी की पहचान मंजूनाथ के रूप में हुई है। उसे लगभग एक सप्ताह पहले POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के लिए उसे अफजलपुर पुलिस थाने के लॉकअप में रखा गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पूछताछ के दौरान किसी अवसर का लाभ उठाकर आरोपी दूसरी मंजिल तक पहुंच गया और वहां से छलांग लगाकर भाग निकला।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आरोपी के कूदने के बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिसकर्मियों ने तत्काल उसका पीछा किया, लेकिन वह अंधेरे और आसपास के इलाके का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा। सूचना मिलते ही जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
घटना के तुरंत बाद जिलेभर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। सभी थाना प्रभारियों को आरोपी की फोटो और विवरण भेजा गया है। सीमावर्ती जिलों की पुलिस को भी सतर्क कर दिया गया है ताकि आरोपी राज्य की सीमा पार न कर सके। प्रमुख बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई विशेष टीमें बनाई गई हैं। आसपास के क्षेत्रों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। तकनीकी निगरानी के तहत मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है ताकि आरोपी तक जल्द पहुंचा जा सके।
इस घटना ने पुलिस हिरासत की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर आरोपी दूसरी मंजिल तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा में किस स्तर पर चूक हुई। विभागीय स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी आरोपी का पुलिस हिरासत से फरार होना सुरक्षा में लापरवाही का परिणाम पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी केवल आरोपी को गिरफ्तार करना ही नहीं बल्कि उसे सुरक्षित हिरासत में रखना भी होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोपी लंबे समय तक गिरफ्तारी से बाहर रहता है तो इससे पीड़ित पक्ष और गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। इसलिए पुलिस को जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को फरार आरोपी के बारे में कोई जानकारी मिले तो वह तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस हेल्पलाइन पर सूचना दें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
फिलहाल पुलिस की कई टीमें लगातार आरोपी की तलाश में जुटी हुई हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों और व्यापक तलाशी अभियान के आधार पर आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं इस पूरे मामले में पुलिस हिरासत की सुरक्षा व्यवस्था की भी विस्तृत समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस थानों की सुरक्षा, हिरासत प्रबंधन और संवेदनशील मामलों में अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता को उजागर किया है। अब सभी की निगाहें पुलिस की कार्रवाई और फरार आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी पर टिकी हुई हैं।