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पटना में 25 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, 3 आरोपी गिरफ्तार

पटना: बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराध से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने ऐसे तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके बैंक खातों के जरिए करीब 25 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर […]

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  • August 17, 2026 9:33 pm IST, Published 5 minutes ago

पटना: बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराध से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने ऐसे तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके बैंक खातों के जरिए करीब 25 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे और इसके बदले प्रत्येक लेनदेन पर कमीशन लेते थे। इस मामले ने साइबर अपराधियों द्वारा आम लोगों के बैंक खातों के इस्तेमाल की बढ़ती चुनौती को फिर सामने ला दिया है।

बैंक खाते किराये पर देकर कमाते थे कमीशन

पटना साइबर थाना पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने अपने बैंक खातों को साइबर अपराध से जुड़े लोगों को इस्तेमाल के लिए दिया था। इन खातों में संदिग्ध रकम आती थी और उसके बाद अलग-अलग माध्यमों से उसे आगे ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को प्रत्येक लेनदेन के बदले करीब 3,000 से 5,000 रुपये तक कमीशन मिलता था।

इस तरह छोटे-छोटे कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराने का यह तरीका साइबर अपराधियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। असली गिरोह के सदस्य खुद सीधे अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करने के बजाय दूसरे लोगों के खातों को पैसे के लेनदेन के लिए इस्तेमाल करते हैं। इससे जांच एजेंसियों के सामने पैसे की वास्तविक कड़ी तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

दो आरोपी Rapido बाइक-टैक्सी से जुड़े बताए गए

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में से दो के Rapido के जरिए बाइक-टैक्सी चलाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी बाइक-टैक्सी राइडर के तौर पर काम करते थे। जांच में उनके बैंक खातों से जुड़े संदिग्ध लेनदेन सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

पुलिस की जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या आरोपियों को पता था कि उनके खातों में आने वाली रकम साइबर अपराध से जुड़ी है या वे केवल कमीशन के लालच में अपने खाते उपलब्ध करा रहे थे। इस सवाल का जवाब जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

कई राज्यों से जुड़ी शिकायतों ने बढ़ाई जांच

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से जुड़े साइबर अपराध की शिकायतें कई राज्यों से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इससे जांच एजेंसियों को संदेह है कि मामला केवल पटना या बिहार तक सीमित नहीं हो सकता है।

साइबर अपराध के मामलों में ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजने के बाद कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता है। ऐसे में किसी एक खाते में संदिग्ध रकम का पहुंचना पूरी कहानी का सिर्फ एक हिस्सा होता है। पुलिस अब लेनदेन की पूरी श्रृंखला और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।

पटना और बक्सर से हुई गिरफ्तारियां

पुलिस ने तीनों आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दो आरोपियों को पटना से जबकि एक आरोपी को बिहार के बक्सर जिले से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पुलिस ने उनके बैंक खातों और उनसे जुड़े डिजिटल लेनदेन की जांच शुरू की।

जांचकर्ताओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन खातों में कुल कितनी रकम आई, कितनी रकम आगे भेजी गई और किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई। इसके साथ ही पुलिस कथित साइबर अपराध नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है।

25 करोड़ के लेनदेन ने बढ़ाई पुलिस की चिंता

करीब 25 करोड़ रुपये के लेनदेन का सामने आना इस मामले को गंभीर बनाता है। खास बात यह है कि आरोपियों को कथित तौर पर हर ट्रांजैक्शन के लिए कुछ हजार रुपये ही मिलते थे, जबकि उनके खातों के जरिए कहीं बड़ी रकम का प्रवाह हुआ। इससे यह आशंका मजबूत होती है कि बैंक खातों को साइबर अपराध के लिए इस्तेमाल करने वाला नेटवर्क बड़े स्तर पर काम कर रहा हो सकता है।

ऐसे मामलों में बैंक खाता धारक खुद यह सोच सकता है कि वह केवल अपना खाता किसी परिचित या दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने दे रहा है, लेकिन अगर खाते से साइबर ठगी की रकम का लेनदेन होता है तो कानूनी जांच का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए बैंक खाते, एटीएम, मोबाइल बैंकिंग या डिजिटल भुगतान की जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध कराना जोखिम भरा हो सकता है।

पुलिस को गिरोह के दूसरे सदस्यों की तलाश

तीनों गिरफ्तारियों के बाद पटना पुलिस अब कथित अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की तलाश कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपी किसके संपर्क में थे और बैंक खातों की जानकारी किस माध्यम से साइबर अपराधियों तक पहुंची।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि 25 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन में कितने बैंक खाते इस्तेमाल हुए और इनमें से कितने खाते सीधे आरोपियों से जुड़े हैं। अगर दूसरे खातों और लोगों की पहचान होती है तो यह कार्रवाई एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क तक पहुंचने में मदद कर सकती है।

आम लोगों के लिए भी बड़ा सबक

पटना का यह मामला आम बैंक ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण चेतावनी है। किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक खाते का इस्तेमाल दूसरे व्यक्ति को नहीं करने देना चाहिए, खासकर तब जब इसके बदले पैसे या कमीशन देने की बात कही जाए। बैंक खाते में होने वाला हर लेनदेन खाताधारक की वित्तीय पहचान से जुड़ा होता है।

साइबर अपराधी अक्सर ऐसे लोगों की तलाश करते हैं, जिन्हें जल्दी पैसे कमाने का लालच देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल किया जा सके। शुरुआत में कुछ हजार रुपये का फायदा आकर्षक लग सकता है, लेकिन संदिग्ध लेनदेन सामने आने पर खाताधारक खुद जांच के दायरे में आ सकता है।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और अधिकारियों का फोकस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने पर है। तीन गिरफ्तारियों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 25 करोड़ रुपये के इस कथित साइबर लेनदेन के पीछे असली नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके तार बिहार के बाहर किन राज्यों तक फैले हैं।

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