मुंबई: महाराष्ट्र में गुरुवार को दो बड़े घटनाक्रम देखने को मिले। जहाँ एक ओर अन्ना हजारे की चेतावनी के बाद सरकार ने विवादास्पद आरटीआई नियमों को फिलहाल टाल दिया है, वहीं दूसरी ओर महिला किसानों के सशक्तिकरण के लिए विधानसभा ने एक ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी दी है।
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा पांच जुलाई से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने नए सूचना का अधिकार (आरटीआई) नियमों को लागू करने पर रोक लगा दी है।
विवाद की जड़: इन संशोधित नियमों में आरटीआई आवेदन शुल्क में बढ़ोतरी, पहचान प्रमाण अनिवार्य करना और प्रत्येक आवेदन में केवल एक विषय तक सीमित रहने जैसी सख्त शर्तें शामिल थीं। अन्ना हजारे का तर्क था कि ये बदलाव आरटीआई कानून की मूल भावना को कमजोर करेंगे और आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना कठिन बना देंगे।
सरकार का कदम: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को इन संशोधनों को लागू न करने का निर्देश दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अन्ना हजारे के साथ विस्तृत चर्चा किए बिना इन नियमों को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। इससे पहले, मुख्य सूचना आयुक्त ने रालेगण सिद्धि जाकर अन्ना हजारे से चर्चा की थी, लेकिन अन्ना अपने रुख पर अडिग रहे।
आरटीआई नियमों के विवाद के बीच, महाराष्ट्र विधानसभा ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए महिला किसानों को कानूनी मान्यता देने वाला बिल सर्वसम्मति से पारित कर दिया है।
बिल का उद्देश्य: इस विधेयक का लक्ष्य महिला किसानों को औपचारिक मान्यता देना है। इसके माध्यम से उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, संस्थागत ऋण (लोन), कृषि सेवाओं और विशेष ‘महिला किसान पहचान-पत्र’ तक सीधी पहुंच प्रदान करने के लिए एक ढांचा तैयार किया जाएगा।
महत्व: अपनी तरह का यह पहला प्रयास है, जो खेती में महिलाओं के योगदान को न केवल स्वीकार करेगा बल्कि उन्हें आर्थिक और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल साबित होगा।