छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित विश्व प्रसिद्ध अजंता गुफाओं में भारी बारिश के दौरान छत से पानी रिसने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो प्रसारित होने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि गुफाओं के अंदर मौजूद ऐतिहासिक मूर्तियों और चित्रों को कोई खतरा नहीं है।
यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल अजंता गुफाएं अपनी प्राचीन बौद्ध चित्रकारी, मूर्तियों और वास्तुकला के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में भगवान बुद्ध के जीवन और बौद्ध धर्म से जुड़ी अनेक कलाकृतियां मौजूद हैं।
अजंता गुफाओं के कुछ हिस्सों में बारिश के दौरान पानी रिसने की समस्या सामने आई। गुफाओं की छत से टपक रहे पानी को जमा करने के लिए एएसआई के कर्मचारियों ने वहां बाल्टियां रखीं। सोमवार को इसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ, जिसके बाद ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे।
एएसआई की उपाधीक्षक डॉ. शिल्पा जामगड़े ने बताया कि भारी बारिश के दौरान इस तरह की स्थिति सामने आती है। उन्होंने कहा कि अजंता की गुफाएं पहाड़ों और चट्टानों को काटकर बनाई गई हैं। बारिश का पानी चट्टानों के भीतर मौजूद प्राकृतिक छिद्रों और दरारों के जरिए नीचे की ओर आता है।
डॉ. जामगड़े के मुताबिक, टपकते पानी को रोकने के साथ-साथ पर्यटकों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता है। पानी फर्श पर जमा होने से लोग फिसल सकते हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर वहां बाल्टियां रखी जाती हैं।
उन्होंने बताया कि गुफाओं के ऊपर जल निकासी की व्यवस्था भी की गई है। इस व्यवस्था की समय-समय पर सफाई और निगरानी की जाती है, ताकि बारिश के पानी को नियंत्रित किया जा सके।
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद अजंता की प्राचीन मूर्तियों और चित्रों को लेकर चिंता जताई गई थी। हालांकि, एएसआई ने स्पष्ट किया कि गुफाओं के अंदर मौजूद मूर्तियों को फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, बारिश के दौरान होने वाला पानी का रिसाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया से जुड़ा है और इसे नियंत्रित करने के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाते हैं। ऐतिहासिक चित्रों और मूर्तियों की सुरक्षा के लिए एएसआई की ओर से लगातार निगरानी भी की जाती है।
अजंता गुफाएं भारत की प्राचीन कला और स्थापत्य विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में इनकी संरचना और अंदर मौजूद कलाकृतियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।