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दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर भारत रत्न की मांग, केंद्र से किया आग्रह

गया: ‘माउंटेन मैन’ के नाम से प्रसिद्ध दशरथ मांझी की 19वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भारत रत्न देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। गया में आयोजित पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार मांझी ने कहा कि दशरथ मांझी का संघर्ष और उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा का […]

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  • August 17, 2026 2:30 pm IST, Published 44 minutes ago

गया: ‘माउंटेन मैन’ के नाम से प्रसिद्ध दशरथ मांझी की 19वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भारत रत्न देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। गया में आयोजित पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार मांझी ने कहा कि दशरथ मांझी का संघर्ष और उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से दशरथ मांझी को सम्मानित किया जाए।

संतोष कुमार मांझी ने कहा कि दशरथ मांझी ने जिस दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के साथ पहाड़ को काटकर रास्ता बनाया, वह असाधारण उदाहरण है। उनका जीवन बताता है कि मजबूत इरादे और लगातार प्रयास से कठिन से कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। मंत्री ने कहा कि दशरथ मांझी को भारत रत्न दिए जाने से समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा तथा नई पीढ़ी को मेहनत और संघर्ष के लिए प्रेरणा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी को भारत रत्न देने के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से आग्रह किया जा रहा है। उनके मुताबिक यह सम्मान केवल किसी व्यक्ति को दिया जाने वाला पुरस्कार नहीं होगा, बल्कि यह संघर्ष, संकल्प और विकास की सोच को सम्मान देने जैसा होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।

दशरथ मांझी का नाम गया के गेहलौर क्षेत्र से जुड़ा है। कहा जाता है कि पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने में हुई कठिनाई और पहाड़ के कारण रास्ते की समस्या ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इसके बाद उन्होंने अकेले पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का संकल्प लिया। वर्षों तक लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने पहाड़ के बीच से रास्ता तैयार किया। उनके इसी असाधारण प्रयास ने उन्हें देश-दुनिया में पहचान दिलाई।

दशरथ मांझी का संघर्ष आज भी ग्रामीण विकास, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक बदलाव से जुड़े विमर्श में उदाहरण के तौर पर सामने आता है। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने प्रयास से ऐसा रास्ता तैयार किया, जिससे स्थानीय लोगों के लिए आवागमन आसान हुआ। उनका जीवन इस बात का प्रतीक माना जाता है कि बदलाव की शुरुआत किसी एक व्यक्ति के संकल्प से भी हो सकती है।

19वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पैतृक क्षेत्र में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। इस मौके पर भारत रत्न की मांग ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को जन्म दिया है।

मंत्री संतोष कुमार मांझी ने कहा कि दशरथ मांझी की पहचान केवल बिहार तक सीमित नहीं है। उनका जीवन देश के हर उस व्यक्ति को प्रेरित करता है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करता है। ऐसे में उन्हें भारत रत्न दिया जाना उनके संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

 

 

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