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सत्य निकेतन हादसे के कथित मालिक हरिराम को भिवाड़ी में पुलिस ने पकड़ा

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना की जांच के बीच पुलिस को अहम सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, हादसे से जुड़ी इमारत के कथित मालिक हरिराम को भिवाड़ी में पकड़ लिया गया है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही […]

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  • September 7, 2026 2:40 pm IST, Published 42 minutes ago

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना की जांच के बीच पुलिस को अहम सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, हादसे से जुड़ी इमारत के कथित मालिक हरिराम को भिवाड़ी में पकड़ लिया गया है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। हादसे के बाद से ही पुलिस इमारत के मालिक और निर्माण से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाने में लगी थी।

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने राजधानी में भवन सुरक्षा और निर्माण नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हादसे में कई लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए। घटना के बाद राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया और आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने कदम उठाए। अब पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि हादसे वाली इमारत से हरिराम का संबंध किस रूप में था और निर्माण एवं संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति क्या है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी इलाके में पकड़ा गया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इमारत के स्वामित्व, निर्माण गतिविधियों और भवन की स्थिति से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकेंगे। पुलिस उससे यह जानने का प्रयास कर सकती है कि इमारत में किस तरह का निर्माण या बदलाव कराया गया था और इस दौरान संबंधित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

इस मामले में दिल्ली नगर निगम की ओर से भी कार्रवाई की जा चुकी है। हादसे के बाद एमसीडी ने दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया था। निलंबित अधिकारियों में डिप्टी कमिश्नर, अधीक्षण अभियंता, कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी चल रही है। निगम स्तर पर हुई कार्रवाई के बाद अब पुलिस की जांच में कथित मालिक की गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

हादसे के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, संबंधित इमारत काफी पुरानी थी। इसके निर्माण का समय 1970 के दशक का बताया गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा था कि उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक इमारत को पहले कोई नोटिस जारी किए जाने या उसे सील किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई थी। साथ ही, निगम को इस भवन के संबंध में किसी शिकायत की जानकारी भी नहीं मिली थी। एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, संपत्ति से संबंधित कुछ दस्तावेज प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड से मिले थे। रिकॉर्ड में संपत्ति कर जमा किए जाने के साथ वर्ष 2007 में कन्वर्जन चार्ज का भुगतान किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इन दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति के स्वामित्व और उससे जुड़े अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही थी।

हादसे के बाद आसपास की एक अन्य इमारत के कमजोर होने की बात भी सामने आई थी। प्रशासन ने उसे मजबूत करने के लिए तत्काल काम कराया था। कमजोर ढांचे को लेकर सुरक्षा के मद्देनजर उसे योजनाबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी भी की गई थी। अधिकारियों का कहना था कि प्राथमिकता आसपास रहने वाले लोगों और राहत-बचाव दलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

पुलिस की मौजूदा जांच में इमारत के निर्माण से जुड़े दस्तावेज, संपत्ति का स्वामित्व, संभावित निर्माण गतिविधियां और संबंधित विभागों की भूमिका अहम मानी जा रही है। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि भवन में किसी तरह का ऐसा बदलाव किया गया था या नहीं, जिससे उसकी संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई हो।

हरिराम को भिवाड़ी में पकड़े जाने के बाद दिल्ली पुलिस उसे दिल्ली लाकर आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि हादसे के समय वह कहां था और घटना से पहले इमारत की स्थिति के बारे में उसे क्या जानकारी थी। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय नहीं माना जा सकता।

सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में पुराने भवनों की सुरक्षा और निर्माण गतिविधियों की निगरानी व्यवस्था पर नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है। एक तरफ नगर निगम ने अपने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, वहीं पुलिस कथित मालिक तक पहुंच गई है। अब जांच आगे बढ़ने के साथ यह सामने आना बाकी है कि इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए कानूनी तौर पर किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

 

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