कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में भाजपा सांसद कंगना रनौत ने राज्य के विकास और केंद्र से मिलने वाले संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने के लक्ष्य के तहत प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ विभाग अपेक्षित गति से काम नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसे विभागों की कार्यप्रणाली से यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने विकसित भारत के मिशन को लेकर अपनी सक्रियता कम कर दी है।
कंगना रनौत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए राज्य से केंद्र सरकार को मिलने वाला राजस्व अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद प्रदेश में विकास कार्यों का प्रभाव पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। भाजपा सांसद ने राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार पर वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि सरकार ने संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं किया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए विकास की जरूरतें अलग तरह की हैं। यहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बुनियादी ढांचे के निर्माण से लेकर लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने में अतिरिक्त चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग और योजनाओं को समय पर लागू करना महत्वपूर्ण हो जाता है। कंगना ने इसी संदर्भ में राज्य में विकास की गति को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।
भाजपा सांसद ने अपने बयान में केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को आगे ले जाने के लिए सभी विभागों और संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी। उनका कहना था कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका जमीन पर प्रभाव भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने विभागीय स्तर पर काम में तेजी लाने की जरूरत पर जोर दिया।
कंगना रनौत ने कांग्रेस सरकार की नीतियों पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं रही है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए उपलब्ध धन का उपयोग ऐसी प्राथमिकताओं पर होना चाहिए, जिनसे आम लोगों को सीधे लाभ मिले। भाजपा सांसद के इस बयान को हिमाचल प्रदेश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप से जोड़कर देखा जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में विकास, रोजगार, पर्यटन, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं लगातार राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में राज्य सरकार के कामकाज और केंद्र से मिलने वाले सहयोग को लेकर राजनीतिक दल अक्सर एक-दूसरे पर सवाल उठाते रहे हैं।
कंगना ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर प्रभावी समन्वय जरूरी है। उन्होंने विभागों से विकास कार्यों में तेजी लाने की अपेक्षा जताई। साथ ही कांग्रेस सरकार पर वित्तीय संसाधनों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है।
हालांकि, कंगना रनौत के आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह अलग विषय है। फिलहाल उनके बयान के बाद हिमाचल में विकास और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने के संकेत हैं।