समस्तीपुर: बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद शराब की कथित तस्करी के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। अब समस्तीपुर में ट्रेन के AC फर्स्ट क्लास कोच से शराब बरामद किए जाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और क्राइम इंटेलिजेंस ब्यूरो (CIB) की टीम ने कार्रवाई करते हुए एक युवती और एक युवक को कथित शराब तस्करी के आरोप में पकड़ा। तलाशी के दौरान दो सूटकेस से बड़ी मात्रा में ब्रांडेड शराब बरामद होने की बात कही गई है।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के AC फर्स्ट क्लास कोच में की गई। टीम को सूचना मिली थी कि ट्रेन के जरिए शराब की खेप ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर निगरानी बढ़ाई गई और संदिग्ध यात्रियों की जांच की गई। तलाशी के दौरान दो सूटकेस पुलिस के निशाने पर आए। जांच में इनके भीतर शराब की बोतलें मिलने की बात सामने आई।
दो सूटकेस में मिली शराब की बड़ी खेप
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों सूटकेस से करीब 75 लीटर ब्रांडेड शराब बरामद होने का दावा किया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने के बाद रेलवे सुरक्षा एजेंसियों ने दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। शुरुआती कार्रवाई के बाद दोनों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए GRP को सौंपे जाने की जानकारी है।
मामले में पुलिस ने शराब की बरामदगी, आरोपियों की भूमिका और शराब को ट्रेन के जरिए ले जाने के संभावित उद्देश्य को लेकर जांच शुरू कर दी है। बरामद शराब किस जगह से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
AC फर्स्ट क्लास में सफर, फिर भी नहीं बच सके
इस घटना ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि कथित तौर पर शराब की खेप को सामान्य या सस्ते यात्रा साधन के बजाय ट्रेन के AC First Class कोच में ले जाया जा रहा था। तस्करी करने वाले लोग अक्सर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। ऐसे में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में होने वाली नियमित जांच अहम भूमिका निभाती है।
हालांकि, केवल AC कोच में यात्रा करना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई बरामदगी और जांच के आधार पर की गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में कानूनी प्रक्रिया के दौरान होगी।
RPF और CIB की कार्रवाई से खुला मामला
मामले में RPF और CIB की टीम की भूमिका सामने आई है। रेलवे से जुड़े सुरक्षा तंत्र द्वारा ट्रेनों में संदिग्ध सामान और यात्रियों की निगरानी की जाती है। शराबबंदी वाले राज्यों में ट्रेन के जरिए शराब की कथित तस्करी रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहती है।
समस्तीपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद शराब के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि पकड़े गए युवक और युवती का इससे पहले भी किसी शराब तस्करी मामले से संबंध रहा है या नहीं।
युवती और युवक से पूछताछ की तैयारी
मामले में पकड़े गए दोनों लोगों से पूछताछ के जरिए शराब की खेप से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों ने शराब कहां से प्राप्त की, किसके निर्देश पर उसे ले जा रहे थे और इसे किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था।
अगर जांच में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो पुलिस आगे अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मामले में कितने लोग शामिल हैं।
बिहार में शराबबंदी के बीच लगातार चुनौती
बिहार में शराबबंदी के बाद शराब की अवैध बिक्री और कथित तस्करी को रोकना प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। दूसरे राज्यों से बिहार में शराब पहुंचाने के लिए तस्करों द्वारा सड़क मार्ग के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन के विभिन्न साधनों का इस्तेमाल करने के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
रेलवे नेटवर्क लंबा होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए हर ट्रेन और हर यात्री की पूरी तरह जांच करना आसान नहीं होता। इसी वजह से खुफिया सूचना और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी को महत्वपूर्ण माना जाता है।
समस्तीपुर की यह कार्रवाई भी इसी कड़ी में देखी जा रही है। दो सूटकेस में कथित तौर पर 75 लीटर शराब मिलने के बाद अब जांच का फोकस केवल बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके पीछे मौजूद सप्लाई चेन का पता लगाने पर भी रहेगा।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है। बरामद शराब की वास्तविक मात्रा, उसकी ब्रांड और पैकिंग, आरोपियों की पहचान तथा उनके खिलाफ दर्ज धाराओं की आधिकारिक जानकारी जांच एजेंसी के रिकॉर्ड से ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
सोशल मीडिया पर वायरल जानकारी के आधार पर सामने आए इस मामले में यह भी जरूरी है कि आरोपियों के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार किया जाए। पुलिस यदि पूछताछ में किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क का पता लगाती है, तो आने वाले समय में मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
निष्कर्ष: समस्तीपुर में ट्रेन के AC फर्स्ट क्लास कोच से कथित तौर पर करीब 75 लीटर शराब की बरामदगी ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और शराब तस्करी को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं। RPF और CIB की कार्रवाई के बाद मामला GRP को सौंपे जाने की जानकारी है। अब जांच से यह पता चलेगा कि शराब की यह खेप कहां से आई और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।