नयी दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना के बाद छात्रों की सुरक्षा और राजधानी में उनके रहने की व्यवस्था को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने हादसे को लेकर सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र निजी पीजी और हॉस्टल में रहने को मजबूर हैं, लेकिन कई जगहों पर सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया जाता। ऐसे में सरकार को छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार ने कहा कि देश के हर विद्यार्थी के लिए Affordable Accommodation की व्यवस्था की जानी चाहिए और किराये को नियंत्रित करने के लिए Rent Control Act लाया जाना चाहिए। संगठन ने इस मुद्दे को केवल दिल्ली तक सीमित न रखते हुए छात्रों की व्यापक समस्या बताया है। NSUI का कहना है कि शिक्षा हासिल करने के लिए दूसरे शहरों से आने वाले विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई के साथ सुरक्षित आवास भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
संगठन ने सत्य निकेतन हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, स्थानीय विधायक, मेयर, पार्षद और एमसीडी कमिश्नर से जवाब मांगने की बात कही है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह की भूमिका और विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए उपलब्ध आवासीय सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। NSUI ने कहा कि हादसे के बाद केवल औपचारिक कार्रवाई या लीपापोती से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिम्मेदारी तय कर ठोस कदम उठाने होंगे।
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— VINOD JAKHAR (@VinodJakharIN) September 7, 2026
NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ की ओर से छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन की मांगें सामने रखी गई हैं। इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल बनाने, अवैध रूप से संचालित हॉस्टल और पीजी को बंद करने तथा हॉस्टल और पीजी के लिए स्पष्ट किराया नियंत्रण कानून बनाने की मांग शामिल है। संगठन ने दिल्ली सरकार से हादसे की जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
NSUI ने राजधानी में संचालित सभी पीजी की जांच कराने और उनके लिए स्पष्ट नियम-कानून तैयार करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जिन परिवारों ने इस हादसे में अपने बच्चों को खोया है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। साथ ही घायल छात्रों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।
छात्र संगठन ने दिल्ली विश्वविद्यालय की हॉस्टल व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उसका कहना है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी विश्वविद्यालय से जुड़े इलाकों में निजी पीजी या किराये के कमरों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे आवासों में भवन की स्थिति, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकासी और अन्य जरूरी सुरक्षा उपायों को लेकर नियमित निगरानी की जरूरत है।
NSUI ने सवाल उठाया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के पास छात्रों की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त हॉस्टल क्यों नहीं हैं। संगठन ने यह भी पूछा कि पिछले दस वर्षों में विश्वविद्यालय के लिए कितने नए हॉस्टल बनाए गए और छात्रों की बढ़ती संख्या के अनुपात में आवासीय सुविधाओं का विस्तार क्यों नहीं हुआ। इसके अलावा विश्वविद्यालय की ऐसी जमीनों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया गया है, जिन्हें कथित तौर पर शादी और अन्य आयोजनों के लिए किराये पर दिया जाता है। NSUI का कहना है कि यदि ऐसी जमीन उपलब्ध है तो वहां छात्रों के लिए हॉस्टल क्यों नहीं विकसित किए जा रहे हैं।
संगठन ने राजनीतिक नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। NSUI के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल प्रचार और सार्वजनिक छवि निर्माण पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित आवास, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और जवाबदेह प्रशासन भी जरूरी हैं। संगठन ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिए विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने की बात कही है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद उठे ये सवाल अब दिल्ली में छात्र आवास, पीजी की सुरक्षा और विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी के व्यापक मुद्दे से जुड़ गए हैं। NSUI ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि हादसे की जांच के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था तैयार की जाए।