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राजस्थान में बुपीवाकेन इंजेक्शन पर रोक, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

जयपुर: राजस्थान सरकार ने एनेस्थीसिया (बेहोशी) के लिए इस्तेमाल होने वाले बुपीवाकेन (Bupivacaine) इंजेक्शन के उपयोग पर एहतियातन रोक लगा दी है। यह फैसला उस घटना के बाद लिया गया है जिसमें हैदराबाद के एक अस्पताल में इस इंजेक्शन के इस्तेमाल के बाद कई मरीजों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इस मामले ने पूरे […]

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  • July 4, 2026 12:30 am IST, Published 1 hour ago

जयपुर: राजस्थान सरकार ने एनेस्थीसिया (बेहोशी) के लिए इस्तेमाल होने वाले बुपीवाकेन (Bupivacaine) इंजेक्शन के उपयोग पर एहतियातन रोक लगा दी है। यह फैसला उस घटना के बाद लिया गया है जिसमें हैदराबाद के एक अस्पताल में इस इंजेक्शन के इस्तेमाल के बाद कई मरीजों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इस मामले ने पूरे देश में स्वास्थ्य विभागों और चिकित्सा संस्थानों को सतर्क कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अगली सूचना तक संबंधित बैच या संदिग्ध बुपीवाकेन इंजेक्शन का उपयोग न किया जाए। साथ ही अस्पतालों से अपने स्टॉक की जांच करने और यदि संबंधित इंजेक्शन उपलब्ध हो तो उसे तत्काल अलग रखने को कहा गया है।

क्या है बुपीवाकेन इंजेक्शन?

बुपीवाकेन एक लोकल एनेस्थेटिक (Local Anesthetic) दवा है, जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की सर्जरी, सीजेरियन डिलीवरी, हड्डी और जोड़ से जुड़े ऑपरेशन तथा अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान मरीज को दर्द से राहत देने और शरीर के किसी हिस्से को अस्थायी रूप से सुन्न करने के लिए किया जाता है। यह दवा लंबे समय तक प्रभावी रहती है, इसलिए ऑपरेशन थिएटर में इसका व्यापक उपयोग होता है।

हैदराबाद की घटना बनी चिंता का कारण

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हैदराबाद के एक अस्पताल में इस इंजेक्शन के इस्तेमाल के बाद 16 मरीजों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इनमें कई मरीजों को दौरे पड़ने, बेचैनी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल मरीजों का उपचार शुरू किया और मामले की जानकारी संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को दी गई।

इस घटना के बाद दवा की गुणवत्ता और उसके संबंधित बैच की जांच शुरू की गई। प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर विभिन्न राज्यों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई।

राजस्थान सरकार ने जारी किए निर्देश

राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और निजी अस्पतालों को निर्देश जारी किए हैं कि संबंधित इंजेक्शन का उपयोग तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए।

विभाग ने यह भी कहा है कि यदि किसी अस्पताल में इस इंजेक्शन के उपयोग के बाद किसी मरीज में असामान्य प्रतिक्रिया देखने को मिलती है तो उसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोल अधिकारियों को दी जाए।

स्टॉक की जांच के आदेश

राज्य के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे मेडिकल स्टोर, अस्पतालों और दवा वितरकों के यहां उपलब्ध स्टॉक की जांच करें। यदि संदिग्ध बैच मिलता है तो उसे जब्त कर आगे की जांच के लिए भेजा जाए।

इसके अलावा दवा कंपनियों और सप्लाई एजेंसियों से भी संबंधित जानकारी मांगी गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रभावित बैच किन-किन राज्यों और अस्पतालों तक पहुंचा है।

मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सभी बुपीवाकेन इंजेक्शन असुरक्षित नहीं हैं। एहतियात के तौर पर केवल संदिग्ध बैच या संबंधित उत्पाद के उपयोग पर रोक लगाई गई है। यदि किसी मरीज की पहले इस दवा से सफलतापूर्वक सर्जरी हो चुकी है तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी इंजेक्शन या दवा का उपयोग केवल प्रशिक्षित डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए। ऑपरेशन से पहले मरीजों को अपनी एलर्जी, पुरानी बीमारियों और दवाओं की जानकारी डॉक्टर को अवश्य देनी चाहिए।

जांच पूरी होने तक जारी रहेगी निगरानी

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच पूरी होने तक स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। यदि जांच में दवा के किसी बैच में गुणवत्ता संबंधी कमी या अन्य तकनीकी समस्या सामने आती है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही सभी अस्पतालों को वैकल्पिक एनेस्थेटिक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीजों के उपचार और सर्जरी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

दवा सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर दवाओं की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और सप्लाई चेन की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर दवाओं की गुणवत्ता की जांच, बैच ट्रैकिंग और अस्पतालों में फार्माकोविजिलेंस व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें। यदि किसी मरीज को इंजेक्शन या दवा के उपयोग के बाद असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।

फिलहाल राजस्थान में बुपीवाकेन इंजेक्शन के उपयोग पर लगी रोक को पूरी तरह एहतियाती कदम माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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