नई दिल्ली: देश में सोने के आयात पर बढ़ती निर्भरता को कम करने और घरेलू स्तर पर निष्क्रिय पड़े सोने को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार एक नए प्रस्ताव पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetization Scheme) के नए संस्करण को तैयार कर रही है। इस बार योजना में ज्वेलर्स की भागीदारी बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग अपने घरों में रखे सोने को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा बना सकें।
बताया जा रहा है कि देश के घरों और धार्मिक संस्थानों में बड़ी मात्रा में सोना वर्षों से बिना किसी आर्थिक उपयोग के रखा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सोने का एक हिस्सा भी बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली में शामिल हो जाए, तो इससे देश को सोने के आयात पर होने वाले भारी विदेशी मुद्रा खर्च में कमी लाने में मदद मिल सकती है।
क्या है सरकार की तैयारी?
सूत्रों के अनुसार, सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को अधिक आकर्षक और व्यावहारिक बनाने के लिए कई बदलावों पर विचार कर रही है। योजना का उद्देश्य लोगों को अपने निष्क्रिय सोने को बैंकिंग प्रणाली में जमा कराने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके बदले जमाकर्ताओं को ब्याज या अन्य वित्तीय लाभ मिल सकते हैं।
नई व्यवस्था में ज्वेलर्स की भूमिका बढ़ाने का प्रस्ताव भी सामने आया है। माना जा रहा है कि ज्वेलर्स के जुड़ने से लोगों का भरोसा बढ़ेगा और योजना की पहुंच छोटे शहरों एवं कस्बों तक भी आसान हो सकेगी।
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम क्या है?
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का उद्देश्य घरों, ट्रस्टों और संस्थानों के पास मौजूद निष्क्रिय सोने को आर्थिक उपयोग में लाना है। इस योजना के तहत लोग निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से अपना सोना जमा कर सकते हैं। इसके बाद उस सोने का उपयोग बैंक और संबंधित संस्थान विभिन्न वित्तीय आवश्यकताओं के लिए कर सकते हैं।
इससे एक ओर लोगों को अपने निष्क्रिय निवेश पर लाभ प्राप्त हो सकता है, वहीं दूसरी ओर देश में सोने के आयात की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। हर वर्ष बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से आयात किया जाता है। इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है और व्यापार घाटे पर भी असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का बेहतर उपयोग किया जाए तो आयात की जरूरत कम होगी। इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ज्वेलर्स की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
सरकार का मानना है कि ज्वेलर्स का देशभर में व्यापक नेटवर्क है और आम लोगों का उन पर भरोसा भी अधिक होता है। यदि ज्वेलर्स इस योजना का हिस्सा बनते हैं तो सोने के मूल्यांकन, शुद्धता की जांच और जमा प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया जा सकता है।
इसके अलावा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी इस योजना की पहुंच बढ़ सकती है, जहां बैंकिंग सुविधाओं की तुलना में स्थानीय ज्वेलर्स अधिक सुलभ होते हैं।
लोगों को क्या हो सकता है फायदा?
यदि नई योजना लागू होती है तो लोगों को अपने घर में निष्क्रिय पड़े सोने पर संभावित वित्तीय लाभ मिलने का अवसर मिल सकता है। साथ ही सोने की सुरक्षित देखरेख, बैंकिंग सुविधा और आर्थिक उपयोग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकती हैं।
हालांकि, योजना के अंतिम स्वरूप, ब्याज दर, जमा अवधि और अन्य नियमों की आधिकारिक घोषणा सरकार द्वारा किए जाने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में परिवारों के पास बड़ी मात्रा में निजी सोना मौजूद है। यदि इसका एक छोटा हिस्सा भी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में शामिल हो जाए तो इससे देश की आर्थिक मजबूती बढ़ सकती है। हालांकि, योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार लोगों का विश्वास जीतने और प्रक्रिया को कितना सरल बना पाती है।
कब हो सकती है घोषणा?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के नए संस्करण की घोषणा आने वाले महीनों में की जा सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इसलिए अंतिम नियम और शर्तें सरकार की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगी।
भारत में घरों में रखा सोना केवल आभूषण या बचत का माध्यम नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक संपत्ति भी माना जाता है। यदि सरकार की नई पहल प्रभावी तरीके से लागू होती है और लोगों का विश्वास जीतने में सफल रहती है, तो इससे न केवल निष्क्रिय सोना आर्थिक गतिविधियों में शामिल होगा बल्कि देश की आयात निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा और नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के अंतिम स्वरूप पर टिकी हुई है।