कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC ) में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य ने राज्य अध्यक्ष पद सहित पार्टी की विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने राज्य की राजनीति और TMC के भीतर संगठनात्मक स्थिति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य को कुछ समय पहले ही राज्य अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, लगभग एक महीने के भीतर ही उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पत्र भेजकर इस पद से हटने की इच्छा जताई। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के बैंक खातों से जुड़े अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी का प्रतिनिधित्व करने जैसी जिम्मेदारियों से भी स्वयं को अलग कर लिया।
सूत्रों के अनुसार, उनके इस्तीफे की चर्चा उस समय तेज हुई जब उनके पुत्र सौरव बसु के एक अलग राजनीतिक गुट से जुड़ने की खबर सामने आई। हालांकि, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने बयान में किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी से व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन जब उनकी निष्ठा और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे तो उनके लिए पद पर बने रहना उचित नहीं रहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में अपने निर्णय पर पुनर्विचार की संभावना नहीं है। उनके बयान को पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों और आंतरिक असहजता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच, TMC से अलग रुख रखने वाले नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनके बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। लोकसभा चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का इस तरह पद छोड़ना संगठन के लिए चुनौती बन सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि तृणमूल कांग्रेस राज्य अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है।